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मिड-डे मील या फाइव-स्टार मेन्यू? साउथ कोरिया के स्कूल का VIDEO देख उड़ जाएंगे होश

 

आजकल, दक्षिण कोरिया के स्कूलों का एक 'लंच मेन्यू' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान और अचंभित हैं: क्या सच में बच्चों को स्कूल में इतना शानदार और आलीशान खाना परोसा जा सकता है? साफ़-सफ़ाई के मानक इतने बेमिसाल हैं कि कोई भी उनसे नज़र नहीं हटा पाता, और पोषण का स्तर इतना ज़बरदस्त है कि डॉक्टर भी उसे सलाम करेंगे। आइए, इस 'जादुई थाली' के पीछे का राज़ जानते हैं।

यह 'ब्लॉकबस्टर' थाली सिर्फ़ ज़बान का स्वाद बढ़ाने वाली चीज़ नहीं है; यह सेहत का एक सच्चा खज़ाना है। इसमें गरमागरम चावल या नूडल्स होते हैं, जिनके साथ प्रोटीन के लिए मीट, मछली या टोफ़ू परोसा जाता है। इसके अलावा, ताज़ी सब्ज़ियों का सलाद, गरमागरम सूप का एक कटोरा, और—खाने की जान—कोरिया की मशहूर 'किमची' (किण्वित पत्तागोभी) भी होती है। खाने को इतने जीवंत और रंग-बिरंगे तरीके से परोसा जाता है कि खाने में नखरे करने वाला बच्चा भी नखरे करना भूल जाता है। कभी-कभी, बच्चों को मीठे में ताज़े फल और आइसक्रीम भी दी जाती है।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया मोटापे की समस्या से जूझ रही है, दक्षिण कोरिया में मोटापे की दर काफ़ी कम है। विशेषज्ञ इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से इन स्कूलों में परोसे जाने वाले संतुलित भोजन को देते हैं। कम तेल, ढेर सारी सब्ज़ियाँ, और किण्वित भोजन—ये सभी मिलकर बच्चों की पाचन शक्ति को मज़बूत करते हैं और उनकी सोचने-समझने की क्षमता को तेज़ करते हैं। यह कोई नई व्यवस्था नहीं है; इसे 1953 में युद्ध के बाद शुरू किया गया था और तब से यह पूरी दुनिया के लिए एक बेहतरीन मिसाल बन गई है।

खास तौर पर, भारतीय सोशल मीडिया यूज़र्स इस वीडियो पर मज़ेदार कमेंट्स कर रहे हैं। कुछ लोग इसे 5-स्टार होटल का बुफ़े बता रहे हैं, तो कुछ लोग अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए अफ़सोस ज़ाहिर कर रहे हैं। वाकई, अच्छा भोजन—बेहतरीन शिक्षा के साथ-साथ—एक मज़बूत भविष्य की नींव रखता है। दक्षिण कोरिया का यह 'स्कूल लंच मॉडल' यह साबित करता है कि अगर सरकार और प्रशासन में इच्छाशक्ति हो, तो बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी शिक्षा—दोनों को ही एक साथ नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।