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मऊ में बाढ़ आपदा प्रबंधन की रिहर्सल, ग्रामीणों को भी किया गया जागरूक: डीएम आनंद वर्धन

 

मऊ, 12 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश प्रशासन संभावित बाढ़ को लेकर अभी से अलर्ट पर है। डीएम आनंद वर्धन ने बताया कि पूरे प्रदेश के 118 जनपदों में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। जनपद मऊ में तहसील घोसी और मधुबन बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं, इसलिए इन दोनों स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई।

उन्होंने बताया कि इस मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस बल, तहसील प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों ने भाग लिया। इसके तहत बाढ़ जैसी आपदा की एक काल्पनिक स्थिति (सिनेरियो) तैयार की गई, जिसमें यह प्रदर्शित किया गया कि बाढ़ के दौरान किसी व्यक्ति का रेस्क्यू कैसे किया जाएगा, उसे प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) कैसे दिया जाएगा और सुरक्षित स्थान तक कैसे पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह अभ्यास स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता के साथ किया गया, क्योंकि लोगों को जागरूक करना भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था। उनका मानना है कि यह मॉक ड्रिल बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता काफी कम रही थी, लेकिन इस वर्ष बाढ़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन पहले से बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना चाहता है। इसी उद्देश्य से यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हर वर्ष आने वाली समस्याओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर जिलाधिकारी ने कहा कि सिंचाई विभाग द्वारा हाई फ्लड लेवल (एचएफएल) के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार जनपद के अधिकांश संवेदनशील क्षेत्रों को तटबंधों से सुरक्षित किया जा चुका है। हालांकि, अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां तटबंध नहीं बने हैं।

उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों के लिए परियोजना प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है और उसे जल्द से जल्द स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में कटान का खतरा अधिक है, वहां बाढ़ सीजन शुरू होने से पहले सुरक्षा संबंधी कार्य पूरे कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि बाढ़ के प्रभाव और तीव्रता को कम किया जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान में जनपद में ऐसे दो महत्वपूर्ण कार्य संचालित हैं, जिनका निरीक्षण उन्होंने स्वयं किया है। प्रशासन का प्रयास है कि 15 जून तक इन कार्यों को पूरा कर लिया जाए, जिससे संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को अधिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।

--आईएएनएस

पीआईएम/डीएससी