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भारत में मातृत्व मृत्यु दर में सुधार की रफ्तार धीमी, 2022-24 में MMR 87 पर पहुंचा

 

भारत ने पिछले दो दशकों में मातृत्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। हालांकि, हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि मातृत्व मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio - MMR) में लगातार हो रही गिरावट की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है। वर्ष 2022-24 के लिए देश का MMR 87 दर्ज किया गया है, जो सुधार के बावजूद एक तरह की स्थिरता की ओर इशारा करता है।

क्या है मातृत्व मृत्यु दर?

मातृत्व मृत्यु दर (MMR) का अर्थ है प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के 42 दिनों के भीतर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या। यह किसी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और महिलाओं को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

दो दशकों में दर्ज हुआ बड़ा सुधार

भारत में वर्ष 2000 के बाद से मातृत्व मृत्यु दर में लगातार गिरावट देखी गई है। संस्थागत प्रसव, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और सरकारी योजनाओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से भी मातृ मृत्यु के मामलों में कमी आई है।

2022-24 में MMR 87 पर पहुंचा

ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का MMR 87 तक पहुंच गया है। हालांकि यह पहले की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार की गति पहले जैसी तेज नहीं रही है। कई राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी हुई है।

किन क्षेत्रों में और काम करने की जरूरत?

विशेषज्ञों के अनुसार मातृत्व मृत्यु दर को और कम करने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:

  • गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना।
  • ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में प्रसूति सेवाओं को मजबूत करना।
  • प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना।
  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और उपचार।
  • पोषण और मातृ स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।

सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में चुनौती

भारत ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप MMR को और कम करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को स्वास्थ्य ढांचे में निरंतर निवेश और सुधार जारी रखने होंगे।