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मतदाताओं के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी: तृणमूल कांग्रेस

 

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित 'वोट चोरी' तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला है। इस दौरान अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस भी राजधानी में मौजूद हैं।

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। यह भारत की जनता के लिए लड़ाई है। और यह ऐसी लड़ाई है जिसमें हम पीछे नहीं हटेंगे। हमारे सांसद आज दिल्ली में हैं, हर अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और मुख्य चुनाव आयुक्त से कई चुनावी गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया कि हमारी अध्यक्ष ममता बनर्जी हमारे सांसदों के साथ, नई दिल्ली के संविधान क्लब में उपस्थित थीं। आज, इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ, हमने ज्ञानेश कुमार द्वारा पीड़ित प्रत्येक वैध मतदाता के लिए न्याय की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च किया।

हमारे मतदाताओं के अधिकारों और हमारे लोकतंत्र की अखंडता के लिए संघर्ष जारी है!

मार्च का नेतृत्व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने किया। इसके अलावा प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, एनसीपी-एसपी नेता सुप्रिया सुले और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।

इस दौरान कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि पूरा देश जाग उठा है। इस राष्ट्र के नागरिक अपने मताधिकार की मांग कर रहे हैं, जिस तरह से उनके वोटों को रद्द किया जा रहा है, उससे हम बेहद आहत हैं। हम देश के लोकतंत्र के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि यह आवाज हर घर और हर दरवाजे तक पहुंचेगी। आजादी के बाद से ही आजादी और लोकतंत्र की जिन जड़ों को कमजोर किया गया है और जिन्हें नष्ट करने का निशाना बनाया गया है, उन्हें ठीक करना जरूरी है। यहां तक ​​कि भाजपा शासन के दौरान कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने भी आगे आकर कहा था कि वे स्वतंत्र नहीं हैं। इससे पता चलता है कि इस दौरान उनके कितने फैसलों से समझौता किया गया होगा।

--आईएएनएस

एमएस/