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लगातार चौथे दिन बाजार में छाई लाली, सेंसेक्स 364 अंक गिरा, निफ्टी 0.53 प्रतिशत टूटा

 

मुंबई, 23 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को लगातार चौथे सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस बीच घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 0.53 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर पहुंच गया।

दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,755.05 से 0.31 प्रतिशत गिरकर 76,515.10 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,151.98 का इंट्रा-डे लो छुआ।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,996.25 से 0.38 प्रतिशत गिरकर 23,904.80 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 0.78 प्रतिशत गिरकर 23,807.20 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

निफ्टी 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम, बजाज फाइनेंस, इंडिगो, सिप्ला, जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील और रिलायंस के शेयर शामिल रहे, जबकि एसबीआई लाइफ, बजाज ऑटो, एम एंड एम, टीसीएस, टाटा कंज्यूमर और आइशर मोटर्स सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों की लिस्ट में शामिल रहे।

इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस बीच, विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन व्यापक रूप से कमजोर रहा, केवल कुछ ही सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। वहीं, निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जिसमें 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1 प्रतिशत की गिरावट आई।

अन्य पिछड़ने वाले शेयरों में निफ्टी मेटल (-0.7 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (-0.4 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (-0.4 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.4 प्रतिशत) शामिल थे।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 0.7 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, इसके बाद निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इस बीच, निवेशकों को एक ही दिन में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 480 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 477 लाख करोड़ रुपए से नीचे आ गया।

यह इस हफ्ते का लगातार चौथा सत्र रहा, जब घरेलू बाजार में गिरावट का सिलसिला बना रहा। इस तरह, इन चार सत्रों में सेंसेक्स 1,760 अंक या 2.3 प्रतिशत गिर गया है, जबकि एनएसई में 465 अंक या लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है।

इन चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति में 4 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई है क्योंकि पिछले शुक्रवार (17 जुलाई) को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का संचयी बाजार पूंजीकरण 481 लाख करोड़ रुपए था।

एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में और अधिक व्यवधान की आशंकाओं के बीच 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिसके चलते निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही और बाजारों ने महंगाई के बढ़ते जोखिम तथा कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले संभावित असर का दोबारा आकलन किया। हालिया व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) संकेतकों से पता चलता है कि लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। इसका संकेत थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार में नरमी के रूप में देखने को मिल रहा है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि ऊंची ऊर्जा कीमतों ने इस उम्मीद को भी मजबूत किया है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ा है।

बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, हालांकि ऑटो सेक्टर ने मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया। इससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा बाजार उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक अभी भी उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनकी आय में लगातार मजबूती, मांग का बेहतर रुझान और भविष्य के प्रदर्शन को लेकर स्पष्टता दिखाई दे रही है।

--आईएएनएस

डीबीपी