भू-राजनीतिक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ बाजार; सेंसेक्स 383 अंक फिसला, निफ्टी 50 प्रतिशत नीचे
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में नए सिरे से उत्पन्न भू-राजनीतिक तनावों के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान आईटी, मेटल, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और मीडिया कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में 0.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 76,132.81 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी 50 118.55 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 23,779.15 पर पहुंच गया।
दिन के दौरान, सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,515.43 से मामूली 69 अंक गिरकर 76,446.05 पर खुला। हालांकि, दिन के कारोबारी सत्र में यह 0.71 प्रतिशत यानी 545 अंक फिसलकर 75,970.52 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं निफ्टी 50 दिन के दौरान अपने पिछले बंद 23,897.70 से मामूली 14.54 अंक फिसलकर 23,883.15 पर खुला और दिन के दौरान यह 159.8 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 23,737.90 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप में 0.46 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.02 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर का प्रदर्शन बेहतर रहा।
निफ्टी50 इंडेक्स में इंफोसिस, एसबीआई लाइफ, एचडीएफसी लाइफ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, टेक महिंद्रा और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत अपोलो हॉस्पिटल, एलएंडटी, कोल इंडिया, भारती एयरटेल, मैक्स हेल्थ और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देकने को मिली। इसके साथ ही, आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, इंडिगो, अदाणी इंटरप्राइजेज, आईसीआईसीआई बैंक और पावरग्रिड के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।
मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "सप्ताह का पहला दिन है और उम्मीद के मुताबिक बाजार गिरावट के साथ खुले हैं। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, सेंसेक्स 180 अंक नीचे है, और निकट भविष्य में हमें जिस एकमात्र आंकड़े पर बारीकी से नजर रखनी है, वह है कच्चे तेल की कीमतें। कच्चे तेल की कीमत 97 डॉलर तक पहुंच गई है। हालात सुधर नहीं रहे हैं, और ऊर्जा की इन ऊंची कीमतों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हमारी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव आ सकता है, खासकर हमारे भुगतान संतुलन और अमेरिकी डॉलर-रुपए की विनिमय दर पर।" उन्होंने आगे कहा कि जैसे कच्चे तेल की कीमतें कम होंगी बाजार पर दबाव कम होगा और फिर से तेजी का रुख देखने को मिलेगा।
इसके अलावा, एक और मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि घरेलू मुख्य बेंचमार्क इंडेक्स और लार्ज-कैप स्टॉक होर्मुज जलडमरूमध्य की घटनाओं से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि व्यापक बाजार में एक स्पष्ट अंतर दिख रहा है; मजबूत कमाई के दम पर स्मॉल-कैप और कुछ मिड-कैप शेयरों में तेजी देखी जा रही है।
2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में हुई बिकवाली के बाद 'वैल्यू बाइंग' (कम कीमत पर अच्छे शेयर खरीदना) को बढ़ावा मिला है। इससे वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं क्योंकि कॉरपोरेट कमाई में गिरावट के बजाय अब बढ़ोतरी (अपग्रेड) देखने को मिल रही है। हालांकि, व्यापक बाजार में तेजी अब खिंचती जा रही है, जिससे दलाल स्ट्रीट सप्लाई-चैन में रुकावट और कमजोर हाई-फ्रीक्वेंसी मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स के जोखिम के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि पहली तिमाही (क्यू1) में मजबूत कंज्यूमर डिमांड और टैक्स में कटौती से हुए फायदों के कारण इनपुट लागत बढ़ने का कॉरपोरेट कमाई पर बहुत कम असर पड़ा; इन फायदों ने प्रोडक्ट और सर्विस की कीमतों में बढ़ोतरी को संभाल लिया।
एक्सपर्ट ने कहा कि आगे चलकर, इस बात का जोखिम बढ़ रहा है कि ये मददगार कारक कमजोर पड़ सकते हैं, जिससे कमाई की उम्मीदें कम हो सकती हैं और व्यापक बाजार की तेजी के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
--आईएएनएस
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