मणिपुर कैबिनेट के फैसले- सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन और ग्रेच्युटी मंजूर
इंफाल, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मणिपुर सरकार की कैबिनेट बैठक में गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में यूनिफाइड पेंशन स्कीम, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत ग्रेच्युटी और काकचिंग जिले में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
कैबिनेट ने मणिपुर सिविल सर्विसेज (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने) नियम, 2026 को मंजूरी दे दी। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।
1 जनवरी 2005 या उसके बाद सेवा में शामिल हुए राज्य सरकारी कर्मचारी अब बाजार आधारित पेंशन के बजाय सुनिश्चित पेंशन का विकल्प चुन सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को सुनिश्चित मासिक पेंशन के साथ एकमुश्त राशि भी मिलेगी। 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को आनुपातिक पेंशन का लाभ मिलेगा। इसके अलावा परिवार पेंशन और महंगाई राहत (डीआर) की सुविधा भी दी जाएगी।
इस योजना में कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान देंगे, जबकि राज्य सरकार 18.5 प्रतिशत योगदान करेगी।
मौजूदा कर्मचारी 31 दिसंबर 2026 तक इस योजना को चुन सकते हैं, जबकि नए नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर विकल्प देना होगा।
कैबिनेट ने मणिपुर सिविल सर्विसेज (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत ग्रेच्युटी भुगतान) नियम, 2026 को भी मंजूरी दी है। यह नियम भी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
अब तक 1 जनवरी 2005 या उसके बाद नियुक्त राज्य कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी देने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं था। केंद्र सरकार के 2021 के नियमों के आधार पर तैयार किए गए नए नियमों के तहत एनपीएस से जुड़े सभी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी और मृत्यु ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम चुनने वाले कर्मचारी भी इस सुविधा के पात्र होंगे। इसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और सेवा के दौरान निधन होने पर उनके परिवारों को एकमुश्त वित्तीय सहायता कानूनी अधिकार के रूप में मिलेगी।
कैबिनेट ने काकचिंग जिले के वाबागई (राजस्व गांव संख्या-66) में लगभग 4 एकड़ (1.6187 हेक्टेयर) सरकारी भूमि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए शिक्षा विभाग को आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
वर्ष 2016 में जिला बनने के बाद से काकचिंग में कोई केंद्रीय विद्यालय नहीं है और यहां सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों की संख्या भी सीमित है।
सरकार का मानना है कि नए केंद्रीय विद्यालय के खुलने से जिले के बच्चों को अपने घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण और किफायती सीबीएसई शिक्षा उपलब्ध होगी।
--आईएएनएस
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