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मानहानि मामले में राहुल गांधी के बरी होने के फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती देंगे वादी विजय मिश्रा

 

सुल्तानपुर, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में सोमवार को बड़ी राहत मिली। सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत चल रहे मामले में दोषमुक्त कर दिया। फैसले के बाद शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने और कानूनी राय लेने के बाद वह फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती देंगे। वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि अदालत ने शिकायतकर्ता को पीड़ित व्यक्ति की श्रेणी में नहीं माना और संबंधित टिप्पणी को मानहानिकारक भी नहीं पाया।

राहुल गांधी सोमवार सुबह करीब 11:12 बजे सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत पहुंचे थे। फैसले को देखते हुए न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। राहुल गांधी के अदालत कक्ष में प्रवेश के बाद दरवाजा बंद कर दिया गया। इससे पहले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कूरेभार के पास कांग्रेस कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए जुटे रहे। वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि अदालत ने अपने फैसले में तीन प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया। उनके अनुसार, अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत सीडी को साबित माना, लेकिन विजय मिश्रा को इस मामले में पीड़ित व्यक्ति नहीं माना। साथ ही, अदालत ने राहुल गांधी की संबंधित टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना और उन्हें आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि उन्हें अभी फैसले की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है। आदेश उपलब्ध होने के बाद उसका विधिक परीक्षण किया जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कहा कि फैसला अभी आया है और अदालत ने राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया है। आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद वह अपने अधिवक्ता के माध्यम से फैसले का अध्ययन करेंगे। इसके बाद कानूनी सलाह लेकर अपीलीय अदालत में अपील करेंगे।

विजय मिश्रा के मुताबिक, वर्ष 2018 में मुकदमा दायर किए जाने के बाद से वह लगातार मामले की पैरवी कर रहे थे। यह मामला मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी की प्रेस वार्ता में की गई कथित टिप्पणी से संबंधित है। उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। शिकायतकर्ता विजय मिश्रा का आरोप था कि राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता के दौरान अमित शाह के लिए ‘हत्यारा’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिससे भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

विजय मिश्रा उस समय भाजपा के जिला उपाध्यक्ष और जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। उन्होंने संबंधित बयान की सीडी को साक्ष्य बताते हुए चार अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया था। मामले की सुनवाई दीवानी न्यायालय से शुरू हुई और बाद में इसे सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष एमपी-एमएलए अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को समन जारी किया था।

इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत मिली थी। उन्होंने उस समय आरोपों से इनकार किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से विजय मिश्रा, अनिल मिश्रा और रामचंद दुबे के बयान दर्ज कराए गए। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेकर सीडी से उसका मिलान कराने की मांग भी की थी।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद सेशन कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी शिकायतकर्ता को राहत नहीं मिली थी। फैसले के बाद अब शिकायतकर्ता की ओर से प्रमाणित प्रति प्राप्त कर कानूनी विकल्पों पर विचार करने और अपीलीय अदालत का रुख करने की बात कही गई है।

--आईएएनएस

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