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'मंदिर व्यावसायिक केंद्र नहीं', राम मंदिर सीईओ भर्ती पर भड़के महंत राजू दास

 

मुजफ्फरपुर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चा और झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंदिर कोई व्यावसायिक केंद्र नहीं होता और राम जन्मभूमि जैसे धार्मिक स्थल की व्यवस्था तथा सेवा से जुड़े पदों पर भगवान की सेवा की भावना रखने वाले व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने झारखंड में छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए और इसे सिलेक्टिव सोच करार दिया।

राम मंदिर सीईओ भर्ती के सवाल पर महंत राजू दास ने कहा कि मंदिर को व्यावसायिक केंद्र की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। मंदिर भगवान की सेवा और आस्था का केंद्र होता है, इसलिए वहां काम करने वाले व्यक्ति में धार्मिक भावना और सेवा का भाव होना जरूरी है। अयोध्या आकर देखा जा सकता है कि सावन के महीने में किस तरह भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान की सेवा केवल औपचारिक या आर्टिफिशियल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा और समर्पण के साथ की जाती है।

महंत राजू दास ने कहा कि राम जन्मभूमि वह स्थान है जहां भगवान राम का प्राकट्य हुआ। ऐसे पवित्र स्थान पर भगवान की सेवा करने वाली प्रवृत्ति रखने वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर में सीईओ या किसी अन्य प्रशासनिक पद पर ऐसे व्यक्ति की जरूरत क्यों नहीं होनी चाहिए, जो भगवान की सेवा की भावना रखता हो? राम जन्मभूमि सामान्य संस्थान नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर की व्यवस्था आधुनिक तरीके से संचालित हो सकती है, लेकिन उसके मूल में भगवान के प्रति श्रद्धा और सेवा की भावना बनी रहनी चाहिए।

झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर महंत राजू दास ने विपक्षी नेताओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव का नाम लेते हुए पूछा कि छात्र आंदोलन के दौरान वे कहां थे? विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। जब किसी खास समूह या व्यक्ति के पक्ष में आवाज उठानी होती है तो कई नेता सामने आ जाते हैं, लेकिन झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर उनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है।

महंत राजू दास ने कहा कि छात्रों की मांगों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए, क्योंकि वे भी देश के बच्चे हैं और उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है। झारखंड के छात्र परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो उनके समर्थन में विपक्षी नेता सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? झारखंड भारत का हिस्सा है और वहां के छात्र भी भारत के नागरिक हैं। ऐसे में उनके मुद्दे को भी राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल और नेता मुद्दों को लेकर सिलेक्टिव रवैया अपनाते हैं। जिन लोगों पर भारत विरोधी नारे लगाने, हिंसा, प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी, ब्राह्मणों-संतों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप लगते हैं, उनके समर्थन में भी कुछ नेता आवाज उठाते हैं, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के समर्थन में वही लोग नजर नहीं आते। यदि झारखंड के छात्र बिना तोड़फोड़, बिना पुलिसकर्मियों से मारपीट और बिना सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए अपनी मांग रख रहे हैं, तो उनके समर्थन में भी नेताओं को आगे आना चाहिए।

महंत राजू दास ने कहा कि झारखंड के छात्र भी देश के बच्चे हैं और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने देश के नेताओं और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस तरह के मामलों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय निष्पक्ष तरीके से विचार करें। राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन छात्रों के भविष्य और उनकी समस्याओं को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर देखना चाहिए। अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी या धोखाधड़ी की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करना हर छात्र का अधिकार है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम