×

मानवरहित हवाई प्रणालियों और हमलावर सैन्य ड्रोन के लिए सेना का रोडमैप जारी

 

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में ड्रोन निर्माण का एक मजबूत और आत्मनिर्भर तंत्र निर्मित किया जा रहा है। खास बात यह है कि ये ड्रोन कोई साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि युद्ध में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक हमलावर ड्रोन व अन्य सैन्य ड्रोन हैं।

भारतीय सेना लगातार ऐसे ड्रोन सिस्टम से लैस हो रही है। इस दिशा में सेना ने कई बड़े व महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं। भारतीय सेना ने अब ‘भारतीय सेना का मानवरहित हवाई प्रणालियों और लोइटरिंग म्यूनिशन के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप’ नामक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज सेना की जरूरतों और ड्रोन के तकनीकी विकास के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगा।

बीते कुछ वर्षों में हुए युद्धों में लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। फिर चाहे वह आतंकवादियों के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर हो, रूस-यूक्रेन युद्ध हो या फिर ईरान-इजरायल संघर्ष। लोइटरिंग म्यूनिशन को कामिकेज ड्रोन अथवा आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है। यह ड्रोन लक्ष्य ढूंढकर उस पर सटीक निशाना लगाता है और वारहेड के साथ शत्रु पर वार करता है। ड्रोन के क्षेत्र में आती नई तकनीक व सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह दस्तावेज सोमवार को नई दिल्ली में जारी किया गया। यह सेना की आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी क्षमताओं के अधिकतम उपयोग पर जोर देता है।

इसमें मानवरहित हवाई प्रणालियों और लोइटरिंग म्यूनिशन (हमलावर ड्रोन) से संबंधित विभिन्न ऑपरेशनल आवश्यकताओं का व्यापक विवरण दिया गया है। सोमवार को उठाया गया यह कदम मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में सेना की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से सामने लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। सेना का यह दस्तावेज उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों को स्पष्ट और व्यावहारिक दिशा प्रदान करने के लिए है।

इस दस्तावेज के आधार पर ये संस्थान अपनी निवेश रणनीतियों, समय, ऊर्जा और तकनीकी प्रयासों को सेना द्वारा चिन्हित प्राथमिक क्षेत्रों के अनुरूप केंद्रित कर सकेंगे। इस रोडमैप को भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह, उप सेना प्रमुख द्वारा जारी किया गया। यह दस्तावेज एक दूरदर्शी रणनीतिक योजना के रूप में तैयार किया गया है। रोडमैप में तकनीकी और परिचालन प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

इसके माध्यम से भारत का ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र एक संगठित और मांग-आधारित तरीके से विकसित हो सकेगा। सेना के मुताबिक इस पहल से सैन्य ड्रोन के क्षेत्र में स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही यह रोडमैप उभरती हुई इस महत्वपूर्ण तकनीक में दीर्घकालिक निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा।

नई दिल्ली में यह रोडमैप जारी करने के इस अवसर पर सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप्स, शिक्षा जगत और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन विभिन्न हितधारकों के बीच राष्ट्र-स्तरीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मूल उद्देश्य एक मजबूत और आत्मनिर्भर ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

दरअसल यह पूरी पहल भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह पहल दर्शाती है कि भारतीय सेना अपनी परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक व तकनीकों के उपयोग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीएससी