'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया ई-संजीवनी का जिक्र, बताया कैसे दूर-दराज के लोगों को मिल रहा फायदा
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में रविवार को देश की टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे यह सेवा देश के दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है।
पीएम मोदी ने कई उदाहरणों के जरिए ई-संजीवनी की सफलता को समझाया। उन्होंने बताया कि अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात साल के बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार था और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में वहां के स्थानीय हेल्थ वर्कर्स ने ई-संजीवनी के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में पता चला कि बच्चे को निमोनिया था। जैसे ही वह एक्सपर्ट डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।
पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 साल के कुन्ही कोया जी की तबीयत एक दिन अचानक बिगड़ गई। तब समुद्र के उस पार कवरत्ती में बैठे अनुभवी डॉक्टर से ई-संजीवनी के जरिए संपर्क किया गया। उस डॉक्टर ने लोकल मेडिकल टीम को गाइड किया और कुन्ही कोया जी को राहत पहुंचाई।
लद्दाख के जांस्कर की कुंजांग डोलमा जी को गर्भावस्था के दौरान कुछ कॉम्प्लिकेशंस हो गए थे। इस मुश्किल समय में ई-संजीवनी उनके काम आई और स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने तुरंत उनकी मदद की।
प्रधानमंत्री ने बताया कि नागालैंड के पेरेन में 12 साल की मिशेम के कान में संक्रमण और बुखार था। उन्हें भी ई-संजीवनी का फायदा मिला। एक्सपर्ट डॉक्टर ने तुरंत उनकी बीमारी पकड़ ली और सही दवाइयां बताईं।
पीएम मोदी ने कहा कि एक समय था जब डॉक्टर को दिखाने में और छोटी सी स्वास्थ्य जांच में भी लोगों को काफी समय लग जाता था। बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन आज देश भर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के जीवन में नई सुविधाएं लेकर आए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये आरोग्य मंदिर एक तरह से पंचायतों के वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। सबसे सुखद बात यह है कि अब गांव के लोग भी नियमित जांच करवा रहे हैं ताकि वे स्वस्थ रहें और इसमें ई-संजीवनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।
बता दें कि ई-संजीवनी भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही एक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है। इसके जरिए देश के नागरिक घर बैठे स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप से ऑनलाइन डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं। इस सेवा का फोकस डॉक्टर और मरीज के बीच की दूरी को खत्म करना है।
--आईएएनएस
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