ममता बनर्जी के कांग्रेस समर्थन पर हन्नान मोल्लाह का हमला, बोले-जिसने पार्टी तोड़ी वही आज पैर पकड़ रही
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने के ममता बनर्जी के फैसले पर सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने कांग्रेस को तोड़ा था, वही अब कांग्रेस के पैर पकड़ रही है। साथ ही बाबा रामदेव के आरक्षण वाले बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की।
ममता बनर्जी के फैसले पर हन्नान मोल्लाह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा,"उनमें उम्मीदवार उतारने की क्षमता नहीं है, उनकी पार्टी का कोई नाम नहीं है, उन्हें बिना नाम के चुनाव लड़ना है, उनमें हिम्मत नहीं है, उन्हें बिना चुनाव चिह्न के लड़ना है। जिस व्यक्ति ने कांग्रेस को तोड़ा था, वही अब कांग्रेस के पैर पकड़ रही है। 1997 में उन्होंने कांग्रेस को तोड़कर आरएसएस के नेतृत्व में टीएमसी बनाई थी और आज जब आरएसएस भी उन्हें बाहर निकाल रहा है, तो वह कांग्रेस के पास जा रही हैं। इसे ही राजनीति या कहीं भी पाखंड कहा जाता है, जहां दोहरी चालें चली जाती हैं।"
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का जिक्र करने पर सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने कहा, "यह उनकी अपनी राय है। आज कांग्रेस की कमजोरी यह है कि वह अपनी भूमिका नहीं निभा रही है जो उसे निभानी चाहिए। जब देश फासीवाद की चपेट में आ गया है, लोकतंत्र खत्म हो गया है, संविधान खत्म हो गया है। आज देश की हर नीति में राष्ट्र-विरोधी और जन-विरोधी रुख अपनाया जा रहा है। ऐसे हालात में कांग्रेस को सबको साथ लाने की भूमिका निभानी चाहिए। पहली लड़ाई फासीवाद के खिलाफ है। अभी बाकी सब भूल जाइए, पहले फासीवाद को हराइए, फिर दूसरे मुद्दे आएंगे। अगर फासीवाद आ गया तो कोई नहीं बचेगा। कांग्रेस आज इसी बुनियादी समझ को खो रही है। इसी वजह से, इतिहास आज कांग्रेस से जो भूमिका निभाने की मांग कर रहा है, कांग्रेस वह भूमिका नहीं निभा पा रही है।"
बाबा रामदेव ने कहा है कि सवर्ण समाज, एससी-एसटी समेत कई पिछड़ समुदायों में एक दूसरे से दूरी बढ़ रही है। संविधान में सबको समानता दी गई है, लेकिन जब बच्चों के दाखिले होते हैं तो जाति पूछी जाती है और उसी आधार पर आरक्षण दिया जाता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हन्नान मोल्लाह ने कहा कि संविधान में दिए गए प्रावधान को मानने की जरूरत है। हमारे देश में आदिवासी और दलितों का आर्थिक आधार पर प्रतिदिन अपमान किया जाता है। उनका हक मार लिया जाता है। संविधान निर्माताओं ने इनकी आर्थिक दशा को देखते हुए ही आरक्षण दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के करीब 35 प्रतिशत लोगों को सवर्णों के अत्याचार से बचाने के लिए आरक्षण दिया था। आज के समय में भाजपा और आरएसएस आरक्षण को खत्म करना चाहती है। आम जनता को आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ना चाहिए।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी