महुआ मोइत्रा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ थाने में दी शिकायत, वीडियो में देंखे मतदाता सूची में बदलाव का लगाया आरोप
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराने का दावा किया है। शिकायत में मतदाता सूची में कथित नियमविरुद्ध बदलाव और पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है।
महुआ मोइत्रा ने शिकायत की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। पोस्ट में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कुछ फैसले लिए। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
Form 6 में बदलाव को लेकर विवाद
महुआ मोइत्रा ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित तौर पर नया सवाल जोड़ने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, नए सवाल में आवेदक से पूछा गया कि क्या वह या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी पिछली SIR प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं।महुआ का दावा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने निर्धारित नियमों में संशोधन किए बिना Form 6 में नया सवाल जोड़ने पर सवाल उठाए थे। चुनाव आयोग की ओर से सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिलने की बात कही गई है।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट
महुआ मोइत्रा की शिकायत ऐसे समय सामने आई है, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा बहाल करने के साथ-साथ मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। महुआ मोइत्रा ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ शिकायत में कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग
महुआ मोइत्रा ने संसद मार्ग थाने में शिकायत देकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत दिए जाने के समय पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की थी। इसलिए शिकायत दर्ज होना और आपराधिक मामला दर्ज होकर आरोप सिद्ध होना, दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस के निर्णय, चुनाव आयोग के जवाब और संबंधित दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करेगी। SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।