महिला आरक्षण बिल पर बोलीं कौसर जहां, महिलाओं को अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक फैसला
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण बिल के लिए 16 अप्रैल से संसद का तीन दिवसीय सत्र बुलाया गया है। दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां ने इस सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए इसे महिलाओं के अधिकार और सम्मान की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया है।
नई दिल्ली में दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे विकास की गति तेज होगी। मेरा मानना है कि यह एक बहुत अच्छा फैसला है, क्योंकि उनकी भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव आएंगे और एक मजबूत संदेश जाएगा।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जो कि एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला है। यह सत्र केवल महिला आरक्षण बिल को पारित करने के लिए बुलाया जा रहा है। इस बिल के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय लिया जाएगा।
कौसर जहां ने कहा कि यह केवल यह एक बिल नहीं है, बल्कि आधी आबादी को उनका अधिकार और सम्मान दिलवाने की दिशा में सराहनीय कदम है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से आधी आबादी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। पहली बार किसी सरकार ने वास्तविक रूप से महिलाओं को भागीदारी देने का काम किया है, जो एक साहसी निर्णय है। यह एक दूरगामी निर्णय है, जो भारत की राजनीति नहीं, पूरे सामाजिक और वैचारिक विमर्श को बदल देगा।
भाजपा नेता अर्चना सिंह ने महिला आरक्षण बिल पर कहा कि सबसे पहले मैं अपने केंद्रीय नेतृत्व को बधाई, शुभकामनाएं और धन्यवाद देती हूं। निश्चित रूप से यदि यह बिल पारित हो जाता है तो यह महिलाओं के हक में एक बड़ी बात होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनल जोशी ने कहा कि हम लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं और यह मांग काफी समय से चली आ रही है। 33 फीसदी आरक्षण मिलने से हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। राजनीतिक क्षेत्र की बात करें तो महिलाएं बहुत सारे बदलाव ला सकती हैं और यह बिल उस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।
--आईएएनएस
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