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महिला समानता दिवस : आधी आबादी के पूर्ण सशक्तीकरण को समर्पित दिन

 

नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। चाहे चुनाव का माहौल हो या किसी रैली में दिया जाने वाला भाषण, महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों पर अक्सर चर्चा होती है और ऐसा होना भी चाहिए, क्योंकि वे समाज में बराबर की हिस्सेदार हैं और देश की आधी आबादी का हिस्सा हैं।

नेताओं को चुनने से लेकर एक मजबूत और समृद्ध समाज बनाने तक, हर चीज की जिम्मेदारी उन पर बराबर की होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को असल में बराबरी का दर्जा और अपने नेता खुद चुनने का अधिकार कब मिला?

महिला समानता दिवस प्रत्येक वर्ष 26 अगस्त को भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) सहित दुनिया के अन्य कई देशों में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को समान अधिकार दिलाने और उनके संघर्षों को याद करने के लिए समर्पित है।

यह दिन वर्ष 1920 में अमेरिकी संविधान के 19वें संशोधन को अपनाने की याद में मनाया जाता है, जिससे महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला था। अमेरिकी संविधान में हुआ यह संशोधन सरकार को लिंग के आधार पर अमेरिकी नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने से रोकता है।

इस दिन को मनाने की आधिकारिक शुरुआत वर्ष 1971 में कांग्रेस ने की थी। इसका उद्देश्य समाज के अंदर महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करके लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण का संदेश पूरी दुनिया में साझा किए जाते हैं।

इस दिन को मनाने के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं, पहला- महिलाओं और पुरुषों के बीच समान अधिकारों को बढ़ावा देना। दूसरा- शिक्षा, रोजगार, राजनीति और समाज में लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता फैलाना और तीसरा- महिलाओं के अधिकारों के लिए हुए संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देना।

अगर भारत के संदर्भ में देखें तो यह दिन उन कई कानूनों और सरकार की योजनाओं को भी समर्पित है, जिसके जरिए महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। मौजूदा सरकार भी कई योजनाओं के जरिए महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है, क्योंकि, हमेशा से ही कहा गया है कि सशक्त नारी से ही सशक्त समाज और सशक्त देश का निर्माण किया जा सकता है।

--आईएएनएस

डीके/एबीएम