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मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग तुष्टीकरण की राजनीति : डिप्‍टी सीएम केशव मौर्य

 

प्रयागराज, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महिला सशक्तीकरण और आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्‍होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की आलोचना करते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग करना 'तुष्टीकरण की राजनीति' है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में व्यापक काम किया, जिसका परिणाम 'गुजरात मॉडल' के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए।

मौर्य ने कहा कि वर्ष 2013 में जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था, तब उन्होंने हरियाणा से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया, जो बाद में एक सफल जनआंदोलन में बदल गया। उनके अनुसार, इस अभियान के प्रभाव से समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आया है और लिंगानुपात में सुधार देखने को मिला है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला ऐतिहासिक है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसी पार्टियां महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही हैं और अब महिलाओं का आक्रोश उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग करना 'तुष्टीकरण की राजनीति' है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को बूथ स्तर तक ले जाएगी और महिलाओं को बताएगी कि विपक्षी दलों ने उनके अधिकारों के साथ किस तरह अन्याय किया है।

मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर महिला आरक्षण की दिशा में बाधाएं खड़ी कीं। भाजपा अपने वादों पर कायम है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर काम कर रही है। समाजवादी पार्टी संविधान के दायरे से बाहर जाकर मांगें उठाती रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम