×

महेश दीक्षित बने नए IB चीफ: केंद्र सरकार ने दी बड़ी जिम्मेदारी, वीडियो में जाने 2 साल का कार्यकाल तय

 

केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए प्रमुख के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को नियुक्त किया है। वे मौजूदा IB निदेशक तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। सरकार ने महेश दीक्षित को दो साल के लिए IB डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया है।महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में IB में स्पेशल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे एजेंसी में दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते रहे हैं। अपनी लंबी सेवाओं के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं और उन्हें खुफिया एवं आतंकवाद-रोधी अभियानों में विशेषज्ञता प्राप्त है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/DnOYY66Aef8?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/DnOYY66Aef8/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।वहीं, मौजूदा IB निदेशक तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। वे 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और जुलाई 2022 से इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख पद पर कार्यरत हैं। डेका को सरकार द्वारा दो बार सेवा विस्तार भी दिया गया था, जिससे उनका कार्यकाल लंबा हुआ।

तपन डेका के नेतृत्व में IB ने कई महत्वपूर्ण खुफिया और सुरक्षा ऑपरेशनों को अंजाम दिया। उनके कार्यकाल को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, महेश दीक्षित की नियुक्ति को आने वाले समय की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। देश में आतंकवाद-रोधी रणनीतियों, साइबर सुरक्षा और आंतरिक खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करने पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।इस नियुक्ति के साथ ही इंटेलिजेंस ब्यूरो के शीर्ष नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा, जो आने वाले वर्षों में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।