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महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में एआईएमआईएम की बढ़त, कांग्रेस-सपा के लिए खतरे की घंटी

 

मुंबई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 2026 के नगर निगम चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, पार्टी ने राज्य की 13 नगरपालिकाओं में कुल 95 पार्षदों को जीत दिलाई है। यह महाराष्ट्र की स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में एआईएमआईएम की अब तक की सबसे मजबूत उपस्थिति है।

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों में मजबूत जीत हासिल करके समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य दलों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी की कोशिश है कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरे राज्य में अपनी मौजूदगी और बढ़ाए।

इस जीत के बाद कांग्रेस को भी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के बीच तेजी से घटती लोकप्रियता को सुधारने के लिए प्रयास तेज करने होंगे, क्योंकि एआईएमआईएम ने इन वर्गों में अपना आधार मजबूत कर लिया है।

एआईएमआईएम ने अपने पारंपरिक गढ़ों से बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत की है और कई अहम क्षेत्रों में राजनीतिक दलों को चुनौती दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एआईएमआईएम ने खासकर मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने वोट शेयर को मजबूत किया है।

छत्रपति संभाजीनगर एआईएमआईएम का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां उसने सबसे ज्यादा पार्षदों को जीत दिलाई। शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि एआईएमआईएम ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और ठाणे नगर निगम (टीएमसी) में भी अपनी पकड़ बनाई है। एआईएमआईएम ने खासतौर पर उन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है जो अल्पसंख्यक बहुल हैं। एआईएमआईएम ने पारंपरिक कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा।

पार्टी ने सोलापुर और धुले में भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है। मुंबई में, एआईएमआईएम ने 2017 के अपने प्रदर्शन (2 सीटें) से बेहतर परिणाम दिखाए हैं और अब बीएमसी में विपक्ष की बेंचों पर सक्रिय भूमिका निभाने का लक्ष्य रखा है।

एआईएमआईएम नेता खैरुनिसा अकबर हुसैन मुंबई के वार्ड नंबर 145 से जीतीं हैं, उनका कहना है कि यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि जनता की है। हम सभी मुद्दों पर काम करेंगे जो हमने उठाए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एआईएमआईएम की रणनीति सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर केंद्रित रही।

95 सीटों की जीत के साथ, एआईएमआईएम ने कई छोटे नगरपालिकाओं में 'किंगमेकर' की भूमिका हासिल कर ली है, जहां किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

एआईएमआईएम ने बताया कि यह सफलता स्थानीय स्तर पर किए गए लंबे समय के राजनीतिक प्रयासों और जमीनी काम का परिणाम है।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम