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महाराष्ट्र में जल संकट के बीच गिरीश महाजन ने की पानी बचाने की अपील, बोले-परिस्थिति बहुत कठिन है

 

मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने पानी की भारी कमी के बीच उसके सही प्रबंधन पर जोर दिया, पेयजल को प्राथमिकता दी और पानी की रीसाइक्लिंग कर दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया ब्लॉक को मिलकर विरोध करने के बजाय बातचीत के लिए एक डेलीगेशन भेजना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विरोध कर रहे आदिवासी छात्रों की 12 मांगें पहले ही मान ली गई हैं, जबकि उन्होंने मंत्री के इस्तीफे की उनकी मांग को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि यह आंदोलन स्पॉन्सर्ड है।

सूखे को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा, "इस साल राज्य में बारिश कम होने की वजह से पानी की भारी कमी है। इस परिस्थिति में पानी कैसे बचाया जाए, अगले आठ महीने तक पीना के लिए या जानवरों के पीने के लिए कैसे बचाया जाए, इसे लेकर हमने सूक्ष्म नियोजक किया है।"

उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि जहां भी पानी बचा है, चाहे वह नदी, तालाब या बांध में हो, वहां पानी के लाइव स्टॉक में से 10 प्रतिशत बफर स्टॉक के रूप में बचाकर रखना है। अभी पानी को लेकर इमरजेंसी जैसी बहुत कठिन परिस्थिति है और इसलिए यह 10 प्रतिशत पानी हम बचाकर रखेंगे।

महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा कि इसके लिए हमने आदेश जारी कर दिया है कि पानी का पूरा उपयोग, रीसाइकिल किया जाए। शहरों से जो पानी निकलकर नदियों में जाता है और खराब हो जाता है, वह किसी काम में नहीं आता, उसका पुनः उपयोग होना चाहिए। उसमें से गार्डन और कंस्ट्रक्शन जैसे कार्यों में भी उसका इस्तेमाल होना चाहिए। करीब 30 प्रतिशत पानी का अभी उपयोग नहीं हो रहा है। इसके अलावा इंडस्ट्री का जो पानी बर्बाद जाता है, उसे भी रीसाइकिल करने के लिए हमने सभी इंडस्ट्रीज को आदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि यह पानी फिर से इस्तेमाल होना चाहिए, रीसाइकिल होना चाहिए, इस संबंध में हमने आदेश दिए हैं। टैंक और कैनाल से पानी की चोरी भी होती है। अवैध रूप से बिना अनुमति के वहां से पानी उठाया जाता है, इसलिए हमने राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की एक संयुक्त टीम बनाई है। ये तीनों टीमें मिलकर इस पर नजर रखेंगी और जो भी पंप बिना अनुमति के चल रहे हैं, उन्हें जब्त किया जाएगा। पीने के पानी और पशुओं के पीने के लिए पानी का इंतजाम करना हमारी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि हालात बहुत कठिन है, अभी तो आठ महीने हमें निकालने हैं। तापमान बहुत बढ़ने वाला है, इसलिए इस भारी संकट का हमें सामना करना है। पानी का कम से कम जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कीजिए। अगर हम थोड़ा सा भी पानी बचा सकते हैं, तो हमें बचाना चाहिए।

--आईएएनएस

केके/वीसी