महाराष्ट्र में एक भी मराठी स्कूल बंद नहीं होने देंगे, पूरे राज्य में लागू करेंगे ‘अकोला पैटर्न’: सुजात अंबेडकर
सतारा, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात अंबेडकर ने महाराष्ट्र में मराठी स्कूलों को बंद किए जाने और शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में एक भी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए और अकोला जिले में लागू किए गए शैक्षणिक मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र के सतारा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। वंचित बहुजन आघाड़ी ने इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी की है। पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. इकबाल चंदूलाल शेख और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. सोमनाथ सालुंखे को उम्मीदवार बनाया है।
सुजात अंबेडकर ने कहा कि पार्टी ने ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जिन्हें शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों की गहरी समझ है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए अनुभवी और योग्य प्रतिनिधियों का होना जरूरी है।
उन्होंने प्रो. सोमनाथ सालुंखे के शैक्षणिक और तकनीकी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अध्यापन के साथ शोध, तकनीकी नवाचार और प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों की मदद की है। पार्टी का उद्देश्य विधान परिषद में शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अकोला जिले का उदाहरण देते हुए सुजात अंबेडकर ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में वहां 80 नए स्कूल शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों को बंद करने के बजाय उनकी संख्या बढ़ाने और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, विद्यार्थियों के लिए जिम और अध्ययन संबंधी सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि वे पुलिस भर्ती, वन विभाग की भर्तियों और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
सुजात अंबेडकर ने कहा कि अकोला में अपनाए गए इस दृष्टिकोण को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें। उन्होंने मराठी माध्यम के स्कूलों को बचाने और शिक्षा को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुजात अंबेडकर ने शिक्षक भर्ती में आने वाली बाधाओं, वेतन संबंधी समस्याओं, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और शिक्षक सेवक व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को न्याय दिलाना और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को दूर करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा को केवल व्यावसायिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। मराठी स्कूलों को मजबूत करने, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
वंचित बहुजन आघाड़ी ने कहा है कि उसके उम्मीदवार विधान परिषद में शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे। अब इन चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
--आईएएनएस
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