महाराष्ट्र: ईरान युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय चालक दल के सदस्य की सुरक्षित वापसी, सुनाई आपबीती
मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के नालासोपारा के रहने वाले एक जहाज के चालक दल के सदस्य रेक्स परेरा की युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित वापसी हुई है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने चालक दल के सदस्य की सुरक्षित वापसी पर बधाई दी है।
युद्ध क्षेत्र में फंसे एक जहाज के चालक दल के सदस्य रेक्स परेरा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि हम 15 अक्टूबर को दुबई से जहाज पर सवार हुए थे। 28 अक्टूबर को हमारी जहाज वहां से निकली और 7 नवंबर को हम ईराक पहुंचे। हम ईरान और ईराक के बॉर्डर पर चार महीने तक फंसे हुए थे।
उन्होंने आगे बताया कि हमारे जहाज का इंजन सीज हो गया था। उसके रिपेयर के बाद हम लोग ईराक पहुंचे, जहां हमारे इंजन में ब्लास्ट हो गया, जिसमें मैं और एक अन्य क्रू गंभीर रूप से घायल होते-होते बचे। इसके बाद युद्ध शुरू हो गया। हमने जहाज के मालिक और कैप्टन से निवेदन किया कि हमें यहां से जाने दो, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
रेक्स परेरा ने कहा कि काफी वक्त तक हमें युद्ध के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि हम सोशल मीडिया और खबरों से कटे हुए थे, लेकिन हमारे परिजन परेशान थे। जब हमने मार्च में 9 से 11 तारीख के बीच हुए हमलों को देखा तो हमारी चिंताएं बढ़ गईं। हम कैसे भी वहां से निकलना चाहते थे।
उन्होंने बताया कि चार महीने तक हमें सैलरी नहीं दी गई। इसके अलावा लालच दिया गया कि सैलरी बढ़ा दी जाएगी। हम चार लोग भारतीय थे, बाकी सभी ईराक के थे। वे आते थे और काम करके चले जाते थे। हमारे शिप पर ऑयल भी नहीं था। सिर्फ खाना बनाने के लिए हम जनरेटर चालू करते थे। हमारे आसपास कोई जहाज भी नहीं थी, जिससे हम मदद ले सकें।
रेक्स परेरा ने बताया कि जहाज की स्थिति भी खराब हो गई थी, फ्यूल नहीं बचा था। कैप्टन और चीफ अफसर जहाज छोड़कर जा चुके थे, जो नियमों के विरुद्ध था। करीब 12 दिन बाद एक नया कैप्टन आया, वो भी कुछ दिन बाद ही शिप छोड़कर भाग गया क्योंकि वे सभी ईराक या ईरान के थे।
उन्होंने बताया कि दूतावास की तरफ से हमें मदद दी गई। वहां से अधिकारी मिलिट्री के साथ आकर हमसे मुलाकात करते थे। हमारे पास सुबह शाम कॉल आ रही थी। उनसे जहाज से बाहर निकालने के लिए मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने कहा कि तुम्हारे पास कोई डाक्यूमेंट्स नहीं हैं। ऐसे में हम मदद न कर पाने के लिए मजबूर हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आसपास दूर दराज में कई जहाज मौजूद थे, जिस पर कई भारतीय फंसे हुए हैं। कई लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं कि जिनको इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी ही नहीं है, उनके पास कागजात ही नहीं हैं। वे अपने लिए मदद की गुहार भी नहीं लगा पा रहे हैं।
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि पिछले कई दिनों से इन्हें निकालने की कोशिश चल रही थी, दूतावास की तरह से भी मदद मिली है। युद्ध जोन में बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। अब युद्ध विराम के बीच सरकार के पास अच्छा मौका है कि उन्हें निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि हमें प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि ईरान के बंदरगाहों और युद्ध क्षेत्र में जितने भी भारतीय फंसे हुए हैं, उन लोगों को सुरक्षित वापस लाया जाए।
--आईएएनएस
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