महाराष्ट्र साइबर की बड़ी कामयाबी, डिजिटल अरेस्ट में फंसी 2 बुजुर्ग महिलाओं को बचाया, एक को 3 करोड़ का चूना
मुंबई, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए दो बुजुर्ग महिलाओं को बचाया है। एक मामले में 74 साल की महिला से 3 करोड़ रुपए की ठगी हुई थी, जबकि दूसरे मामले में दिल्ली की एक बुजुर्ग महिला को समय रहते बचा लिया गया, जो उसी गिरोह के जाल में फंस चुकी थी और 27 लाख रुपए गंवा चुकी थी।
यह पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर से शुरू हुआ। यहां 74 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला डिजिटल अरेस्ट घोटाले का शिकार हो गई। ठगों ने खुद को पुलिस और सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर महिला को डराया और उसे डिजिटल अरेस्ट में होने का झांसा दिया। डर के कारण महिला ने ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में करीब 3 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए।
घटना की जानकारी मिलते ही महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी टीम छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की मदद के लिए मौके पर पहुंची। टीम ने ठगी गई रकम के मूवमेंट का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
तकनीकी जांच के दौरान टीम ने लेनदेन के रास्ते का लाइव विश्लेषण किया। जांच में एक 'लेयर-1 म्यूल अकाउंट' मिला, जो धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहा था। पता चला कि ठगी गई रकम में से लगभग 89 लाख रुपए इसी खाते से होकर गुजरे थे। इसी खाते में यूको बैंक के जरिए 14 लाख रुपए का एक नया आरटीजीएस क्रेडिट भी आया था।
इसी 14 लाख के लेनदेन ने पुलिस को दूसरा बड़ा सुराग दिया। महाराष्ट्र साइबर को शक हुआ कि उसी गिरोह द्वारा किसी और को भी निशाना बनाया जा रहा है।
इस सुराग पर तुरंत कार्रवाई करते हुए साइबर टीम ने बैकवर्ड ट्रेसिंग शुरू की। यूको बैंक को तत्काल नोटिस भेजकर केवाईसी विवरण मांगा गया। केवाईसी से पता चला कि पैसे भेजने वाली महिला नई दिल्ली की रहने वाली है।
आगे की जांच में यह पुष्टि हो गई कि दिल्ली की यह महिला भी उसी डिजिटल अरेस्ट गिरोह के जाल में फंसी हुई है और ठगों को लगातार पैसे भेज रही है। वह अब तक 27 लाख रुपए ट्रांसफर कर चुकी थी और पैसा भेजने की तैयारी में थी।
महाराष्ट्र साइबर ने बिना देर किए दिल्ली पुलिस से संपर्क किया और महिला की पहचान कर उसे आगे की ठगी से बचा लिया। समय पर हस्तक्षेप न होता तो महिला को और बड़ा वित्तीय नुकसान हो सकता था।
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस या सीबीआई फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। ऐसा कोई भी कॉल आए तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
--आईएएनएस
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