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पंचामृत और आम्र रस से महाकाल का अभिषेक, अक्षय तृतीया पर माथे पर शेषनाग को दिया स्थान

 

उज्जैन, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया पर बाबा महाकाल के अद्भुत दर्शन के लिए भक्त भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।

वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन देशभर में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। महाकाल के दरबार में भी अक्षय तृतीया के मौके पर बाबा का मनमोहक शृंगार किया गया, जिसे देखकर पूरा मंदिर परिसर 'ओम नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा।

रविवार तड़के सुबह 4 बजे वीरवद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुलते ही पंचामृत अभिषेक के साथ बाबा का विशेष रूप से आम के रस से अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को भस्म रमाकर, भांग और मस्तक पर शेषनाग सजाकर दिव्य स्वरूप दिया गया। नवीन मुकुट धारण किए बाबा के इस साकार दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के बीच पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

अक्षय तृतीया के दिन बाबा के माथे पर शेषनाग को सजाया गया, जो भगवान विष्णु के प्रतीक है। आज के दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। माना जाता है कि आज के दिन किए गए कार्य का अक्षय फल (कभी न समाप्त होने वाला) मिलता है, यानी कभी न खत्म होने वाला है, चाहे वह कार्य अच्छा हो या बुरा। आज के दिन दान का बहुत महत्व है।

महाकाल मंदिर में रोजाना भस्म आरती होती है और हर दिन भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में भस्म आरती में भाग लेती है। भस्म आरती के दौरान पहले बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे जन्म और मृत्यु से परे माना जाता है, और फिर अलौलिक शृंगार कर भक्तों के सामने राजा के स्वरूप में आते हैं। बाबा का यह रूप सांसारिक होता है, जिसे प्राकृतिक चीजों से सजाया जाता है।

बता दें कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के नियमों में बदलाव किया है। पहले मंदिर के काउंटर से भस्म आरती के लिए पंजीकरण कराना होता था लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर मे शुल्क के साथ भस्म भारती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। भस्म आरती के लिए एक दिन पहले बुकिंग करना अनिवार्य होगा।

--आईएएनएस

पीएस/एएस