महा वॉकथॉन 2026 में मिट्टी-जल संरक्षण का संदेश, मंत्रियों ने युवाओं की भागीदारी पर दिया जोर
मुंबई, 21 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में आयोजित ‘महा वॉकथॉन 2026–वॉक फॉर वॉटर’ के दौरान राज्य सरकार के मंत्रियों ने मिट्टी और पानी के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक और मंत्री संजय राठौड़ ने जल एवं मृदा संरक्षण को भविष्य की महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जल और मिट्टी संरक्षण की सोच नई नहीं है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुधाकरराव राजूसिंग नाइक की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भविष्य में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में काम शुरू किया था।
नाइक ने कहा, संबंधित विभाग का गठन 1991-92 के आसपास हुआ था और वर्ष 1999 में इसके लिए एक कॉर्पोरेशन भी बनाया गया था, जिसके पहले चेयरमैन सुधाकर राव नाइक रहे थे।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की सोच दूरदर्शी थी। खेती के लिए उपजाऊ जमीन बेहद जरूरी है, लेकिन यदि मिट्टी का लगातार कटाव होता रहे तो जमीन की उत्पादकता प्रभावित होगी। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी और जल संसाधनों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय राठौड़ ने भी मिट्टी और पानी को देश और महाराष्ट्र की प्रमुख संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि जल एवं मृदा संरक्षण केवल किसी एक सरकारी विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए आम लोगों में जागरूकता पैदा करना जरूरी है, ताकि वे आने वाले समय में इन प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझें और उनके संरक्षण में योगदान दें।
राठौड़ ने युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र के निर्माण में युवाओं का समर्थन बेहद जरूरी है। युवाओं को सवाल पूछने और अपने आसपास के विकास को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि देश और महाराष्ट्र की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक संपत्तियां सभी की साझा जिम्मेदारी हैं।
मंत्री संजय राठौड़ ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्देश देगा, उसके अनुसार आगे विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में उन्होंने एक आंदोलन शुरू किया था और यह आंदोलन बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के अनुरूप पहचान को लेकर था। उन्होंने कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।
वहीं, वंदे मातरम मुद्दे पर विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को कानून का पालन करने का अधिकार और जिम्मेदारी है। उन्होंने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में इसे सम्मान का अवसर बताया और कहा कि देश में अधिकांश लोग राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से परिचित हैं।
--आईएएनएस
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