उदय तिथि के अनुसार 26 को महाष्टमी, 27 को मनाई जाएगी महानवमी
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि में तिथियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। उदय तिथि के आधार पर 26 मार्च को महाष्टमी का पूजन किया जाएगा, जबकि 27 मार्च को महानवमी का पर्व श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।
नवरात्रि के पावन दिनों में महाष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व माना जाता है। इन दोनों दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है और कन्या पूजन जैसी परंपराएं भी निभाई जाती हैं। भक्त उपवास रखकर देवी की आराधना करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
महाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु हवन, कन्या पूजन और व्रत के माध्यम से देवी की आराधना करते हैं। वहीं महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो नवरात्रि का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, तिथियों के आरंभ और समाप्ति के समय के कारण इस बार कुछ लोगों में भ्रम की स्थिति रही, लेकिन उदय तिथि के अनुसार पूजन का समय निर्धारित कर दिया गया है, जिससे भक्त सही दिन पर पूजा-अर्चना कर सकें।
मंदिरों और घरों में दोनों ही दिनों के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु मां दुर्गा के पूजन के साथ-साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। इस दौरान वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उदय तिथि को ध्यान में रखकर पूजा करने से धार्मिक अनुष्ठानों का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसी कारण अधिकांश श्रद्धालु अब निर्धारित तिथियों के अनुसार ही पूजा करने की तैयारी में जुट गए हैं।
कुल मिलाकर, 26 मार्च को महाष्टमी और 27 मार्च को महानवमी का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा, जिससे नवरात्रि का पावन उत्सव अपने चरम पर पहुंच जाएगा।