मध्य प्रदेश में धान खरीदी का पंजीयन 4 नवंबर तक होगा : सीएम मोहन यादव
भोपाल, 2 नवंबर (आईएएनएस) मध्य प्रदेश में धान उत्पादक किसानों का खरीदी के लिए पंजीयन अब चार नवंबर तक किया जाएगा। यह ऐलान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया है । मुख्यमंत्री यादव सोमवार को मंत्रालय से सिवनी जिले की सिमरिया मंडी प्रांगण में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों के कल्याण, उनकी आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने तथा कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमने किसानों से जो वादा किया था, उसे पूरा भी किया। इन दिनों प्रदेश में किसानों को खेती-किसानी के कामों के लिए दिन में 10 घंटे बिजली दी जा रही है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि रबी फसलों की सिंचाई के लिए दिन के समय 10 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति से किसानों को रात में सिंचाई की मजबूरी से राहत मिलेगी।
उन्होंने धान उपार्जन का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की सुविधा और अधिकाधिक पात्र किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज विक्रय का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धान उपार्जन के पंजीयन की अंतिम तिथि चार नवंबर तक बढ़ाई गई है। कोई भी पात्र किसान पंजीयन से वंचित न रहे, इस दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जिले का जीराशंकर चॉवल अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है। बड़े आकार और मिठास से भरपूर सिवनी का जंबो सीताफल भी जिले की विशेष पहचान बन रहा है।
उन्होंने कहा कि जिले में टमाटर, मिर्च, अलसी, सरसों और सूरजमुखी जैसी फसलों की खेती भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिले, इसी उद्देश्य से सिवनी में शीघ्र ही फूड पार्क की स्थापना की जाएगी। इससे कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके माध्यम से खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के साथ किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पारंपरिक फसलों के साथ दलहन, तिलहन, उद्यानिकी और नकदी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि बाजार की मांग के अनुरूप किसान फसल उत्पादन कर सकें और कृषि जोखिम को भी कम कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से जोड़कर किसानों की आय के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। किसानों के परिश्रम से ही मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
--आईएएनएस
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