मध्य प्रदेश: महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक बोले- 'देश की आधी आबादी को उसका हक देना सरकार की मंशा नहीं'
भोपाल, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सोमवार को जनहित के मुद्दे उठाने और सदन के लिए मुख्य विषयों को अंतिम रूप देने की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके साथ ही, सभी 230 सीटों पर महिला आरक्षण लागू करने के प्रतिकांग्रेस नेताओं ने अपने समर्थन को दोहराया।
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी की उपस्थिति में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर यह बैठक हुई। इसमें कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया, झूमा सोलंकी, नारायण सिंह पट्टा, संजय उइके, दिनेश जैन 'बॉस', चंदा सिंह गौर, बाबू डंडेल और सचिन यादव भी शामिल हुए।
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार यह प्रचार करना चाहती है कि वह महिला हितैषी है, लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है। भाजपा महिलाओं की हितैषी नहीं है। महिलाओं को जो दुख मिला है, वह सत्तापक्ष ने ही दिया है। उसे माफी मांगनी चाहिए थे, लेकिन इसके बजाय विपक्ष अधिक प्रचार में जुटा है।
विधायक बाबू डंडेल ने कहा कि हमारी बैठक का एजेंडा था कि हम सत्तापक्ष को जवाब देंगे। महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना ही चाहिए। दिनेश जैन 'बॉस' ने कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है। अब राजनीतिक दलों को टिकट बंटवारे में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू कर देना चाहिए, लेकिन भाजपा सिर्फ देश को गुमराह करना चाहती है।
सचिन यादव ने कहा कि भाजपा की नीयत में खोट है। महिला आरक्षण का मुद्दा सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा है। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाने का उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक लाभ लेना है। सरकार की नीयत और सोच में बहुत बड़ा फर्क है। देश की आधी आबादी को उसका हक देना सरकार की मंशा नहीं है।
कांग्रेस विधायक चंदा सिंह गौर ने कहा कि भाजपा की सरकार महिलाओं के खिलाफ है। वह नहीं चाहती है कि महिलाओं को आरक्षण मिले। वहीं, संजय उइके ने कहा कि जब 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है, तब से भाजपा को महिला आरक्षण लागू करने की हिम्मत नहीं हुई। कांग्रेस की मांग है कि आज की स्थिति में महिला आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए।
बैठक के बाद विधायक झूमा सोलंकी ने कहा, "भाजपा सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों विषयों को लेकर उलझाने वाली बात कर रही है। बहन-बेटियों को सम्मान देना है और उनकी राजनीति में भागेदारी को बढ़ाना है, तो महिला आरक्षण विधेयक को सीधे तौर पर पारित कराना चाहिए।
--आईएएनएस
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