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मां कल्याणी देवी मंदिर में शीतला अष्टमी की विशेष पूजा, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

 

प्रयागराज, 8 जुलाई (आईएएनएस)। शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और मां भगवती के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए प्रार्थना की।

शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर के महासचिव पंडित श्याम जी पाठक ने बताया कि मां कल्याणी देवी धाम में शीतला अष्टमी की परंपरा विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि यहां वर्ष में चार शीतला अष्टमी मनाई जाती हैं, जो चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ती हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान चैत्र मास से शुरू होता है और आषाढ़ अष्टमी के साथ इसका समापन होता है।

उन्होंने बताया कि शीतला अष्टमी के अवसर पर माताएं अपने पुत्रों और पतियों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए सप्तमी तिथि को व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान सप्तमी की रात को हलवा-पूरी बनाया जाता है। इसके बाद अष्टमी के दिन मां शीतला को वही भोजन भोग के रूप में अर्पित किया जाता है और परिवार के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण करते हैं।

पंडित श्याम जी पाठक ने बताया कि इस परंपरा के तहत कई घरों में अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता। सप्तमी को तैयार किए गए भोजन को ही पूरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसी कारण इसे बसौड़ा या बसिवटा अष्टमी भी कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में स्थित मां कल्याणी देवी धाम में यह परंपरा पिछले करीब 150 वर्षों से लगातार चली आ रही है। पूर्वजों के समय से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पालन किया जा रहा है।

शीतला अष्टमी के मौके पर मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने मां कल्याणी देवी के दर्शन किए, विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया और परिवार की सुख-शांति के लिए आशीर्वाद मांगा। प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम