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लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों के समर्थन में उतरे राजेंद्र पाल गौतम, सरकार पर साधा निशाना

 

लखनऊ, 16 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, छात्रों पर की गई कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी।

राजेंद्र पाल गौतम ने आईएएनएस से बातचीत में आरोप लगाया कि लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने अचानक विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। बीकॉम ऑनर्स जैसे सामान्य डिग्री कोर्स की फीस लगभग एक लाख रुपए कर दी गई है, जबकि अधिकांश अन्य पाठ्यक्रमों की फीस भी लगभग दोगुनी कर दी गई है। फीस वृद्धि के विरोध में छात्र कुलपति से मिलना चाहते थे, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं कराई गई। छात्रों को पहले आश्वासन दिया गया कि कुलपति उनसे मिलेंगे, लेकिन बिना बातचीत किए ही वे वहां से निकलने लगे। ऐसे में छात्र उनकी गाड़ियों के सामने खड़े होकर उनसे अपनी बात सुनने की मांग करने लगे। इसके बाद छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए और बाद में छुट्टियों के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि सरकार न तो युवाओं को रोजगार दे पा रही है और न ही परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बना पा रही है। देश में लगभग 100 परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। ऐसे हालात में सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर कार्रवाई कर रही है और लगातार फीस बढ़ा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी अधिक फीस क्यों बढ़ाई जा रही है। सरकार गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों की शिक्षा का खर्च वहन करने में भी असमर्थ दिखाई दे रही है। स्कॉलरशिप और फेलोशिप भी बंद कर दी गई हैं, जिससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और कठिन हो गया है।

कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि आज इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ जैसी डिग्रियों की पढ़ाई सरकारी संस्थानों में भी कोचिंग समेत लाखों रुपए से लेकर करोड़ रुपए तक की लागत वाली हो गई है। सामान्य वर्ग के अधिकांश परिवार भी इतना खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद डिग्री मिलने के बाद रोजगार की कोई गारंटी नहीं है और बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार रह जाते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों को उद्योग बना दिया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, विज्ञान और श्रम मंत्रालय के संयुक्त बजट से भी अधिक राशि भारतीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन भरने पर खर्च कर रहे हैं। इसके बावजूद परीक्षा लीक होने का खतरा बना रहता है।

परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले सीबीएसई, यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी सरकारी संस्थाएं परीक्षाएं आयोजित करती थीं, लेकिन अब आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से परीक्षाएं कराई जा रही हैं, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

कांग्रेस संगठन की मजबूती को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर से लेकर ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी और बूथ स्तर तक संगठन सृजन का अभियान चलाया जा रहा है। जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाकर आगामी चुनावों में भाजपा सरकार को चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।

'वन नेशन, वन इलेक्शन' के प्रस्तावित विधेयक पर राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र सरकार पर विपक्ष को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई, पेपर लीक, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन वह केवल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के पीछे 'वन नेशन, वन पार्टी' की सोच काम कर रही है। जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को कमजोर किया जा रहा है। देश की जनता अब इन मुद्दों को समझ चुकी है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से इसकी शुरुआत होगी।

--आईएएनएस

पीएसके