×

लखनऊ: अलकायदा मॉड्यूल के 3 आतंकियों को उम्रकैद की सजा

 

लखनऊ, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आतंकवाद के खिलाफ बड़ी न्यायिक कार्रवाई सामने आई है। एनआईए/एटीएस स्पेशल कोर्ट ने अलकायदा से जुड़े मॉड्यूल अंसार गजवात उल हिंद के तीन आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दोषियों में मिन्हाज अहमद, मसरुद्दीन और तौहीद अहमद शाह शामिल हैं, जो राज्य में बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे। कोर्ट ने सभी सबूतों, गवाहों और लंबी सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, 11 जुलाई 2021 को यूपी एटीएस ने लखनऊ के दुबग्गा इलाके से मिन्हाज अहमद को गिरफ्तार किया था। उसकी निशानदेही पर मसरुद्दीन और तौहीद अहमद शाह को भी पकड़ा गया। मिन्हाज के घर से एक कुकर बम बरामद हुआ था, जबकि अन्य दोनों आरोपियों के ठिकानों से विस्फोटक सामग्री और पिस्टल मिली थी। इन बरामदगियों ने जांच एजेंसियों को बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने में मदद की।

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि तीनों आतंकी 15 अगस्त 2021 के आसपास उत्तर प्रदेश में सीरियल ब्लास्ट करने की तैयारी में थे। इतना ही नहीं, ये मानव बम के जरिए भी बड़े पैमाने पर तबाही फैलाने की योजना बना रहे थे। एजेंसियों का कहना है कि इनका मकसद स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील मौके पर देश में दहशत फैलाना था।

पूछताछ और जांच के दौरान सामने आया कि तीनों आरोपी अलकायदा के हैंडलर उमर हलमंडी के निर्देश पर काम कर रहे थे। वह भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकी भर्ती और नेटवर्क विस्तार में सक्रिय था। राम मंदिर पर फैसले के बाद से ये आतंकी उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे।

एनआईए के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एमके सिंह ने बताया कि यह मामला साल 2021 का है और वह इसे शुरू से देख रहे हैं। उस समय एटीएस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति, जो अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर अलकायदा के लिए काम करता है, भारत में लोगों को जोड़ने और एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा है। इसी सूचना के आधार पर 11 जुलाई 2021 को एटीएस ने दुबग्गा और मड़ियांव इलाके में छापेमारी की। दुबग्गा में मिनहाज के घर से प्रेशर कुकर बरामद हुए। शुरुआत में एटीएस इस मामले की जांच कर रही थी, बाद में इसे एनआईए को सौंप दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक एफआईआर तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी। बाद में जांच में मिनहाज और मुशीर के पकड़े जाने के बाद शकील, मुईद और मुस्तकीम के नाम सामने आए। मुईद, मुस्तकीम और शकील ने मिनहाज को पिस्टल उपलब्ध कराई थी। इन तीनों को पहले ही 20 महीने की सजा हो चुकी है और अब इस मामले में अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई है। इस केस में अभियोजन पक्ष ने 42 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने 5 गवाह पेश किए। कुल 230 दस्तावेजों में से 109 को अदालत ने प्रमाणित माना। अदालत ने आरोपियों को उम्रकैद तक की सजा सुनाई है।

उन्होंने आगे कहा कि जांच में सामने आया कि आरोपियों की योजना 15 अगस्त से पहले लखनऊ के सरकारी संस्थानों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर बम विस्फोट करने की थी। इसके लिए उन्होंने बम बनाने की सामग्री इकट्ठा की और ऑनलाइन प्रशिक्षण भी लिया था। इस साजिश में कश्मीर निवासी एक व्यक्ति की भी भूमिका सामने आई, जिसने इन लोगों को जोड़ा था। वह अलकायदा से जुड़े आदिल नवी मूसा का रिश्तेदार था, जो पहले कश्मीर में मारा जा चुका है। आरोपियों के पास से विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई थी।

--आईएएनएस

पीएसके