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LPG Price Hike: भारत में रसोई गैस महंगी क्यों हुई? क्या सियासत से ज्यादा वैश्विक संकट है असली वजह

 

देश में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि सरकार और ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह घरेलू नीति नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति और सप्लाई में बाधा जैसे कई कारणों ने भारत में एलपीजी की कीमतों को प्रभावित किया है।

₹60 तक महंगा हुआ घरेलू सिलेंडर

हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में करीब ₹60 तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भी लगभग ₹115 की वृद्धि हुई है। दिल्ली में 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर अब लगभग ₹913 तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी लगभग एक साल बाद की गई है।

पश्चिम एशिया तनाव का सीधा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी सैन्य गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इससे तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें से अधिकांश आपूर्ति मध्य-पूर्व के देशों से आती है। ऐसे में क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ने पर सप्लाई चेन प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ जाती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य भी बड़ा कारण

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया से आने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही, बीमा लागत और परिवहन खर्च बढ़ जाता है, जिससे गैस की कीमतें ऊपर चली जाती हैं।

आयात पर ज्यादा निर्भरता

भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक है। देश में कुल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है क्योंकि भारत में एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं।

सरकार ने सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की

सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए एलपीजी की वैकल्पिक सप्लाई बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। भारत अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से भी गैस खरीद बढ़ा रहा है ताकि मध्य-पूर्व पर निर्भरता कम की जा सके।

सियासत बनाम आर्थिक हकीकत

एलपीजी कीमतों में वृद्धि को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विपक्ष इसे सरकार की नीतियों की विफलता बता रहा है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वैश्विक ऊर्जा संकट का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में गैस समेत अन्य ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बना रह सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और आम उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।