लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर जोरदार बहस, फुटेज में देंखे शिक्षा मंत्री को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा में मंगलवार दोपहर 2 बजे से 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हुई। यह विधेयक वर्ष 2024 में बनाए गए कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल उस समय गरमा गया जब शिक्षा मंत्री को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार देगा और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता मजबूत करेगा। उनके अनुसार, तकनीकी बदलावों और नए अपराधों को ध्यान में रखते हुए कानून में संशोधन आवश्यक हो गया था।
शिक्षा मंत्री को लेकर संसद में हंगामा
विधेयक पर चर्चा के बीच विपक्ष ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर सरकार पर निशाना साधा। संसद परिसर के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है जिसने एक रेप आरोपी का बचाव किया था। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति कई गंभीर सवाल खड़े करती है।लोकसभा के भीतर भी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसी मुद्दे को उठाया। हालांकि, उनकी टिप्पणी को बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया। प्रियंका गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
सत्ता पक्ष ने मांगा सबूत और माफी
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके समर्थन में ठोस प्रमाण पेश किए जाएं। सत्ता पक्ष के नेताओं ने प्रियंका गांधी से अपने बयान पर माफी मांगने की भी मांग की।हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही, हालांकि बाद में चर्चा फिर शुरू हुई।
अखिलेश यादव ने भी साधा सरकार पर निशाना
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपने वादों को पूरा करने के बजाय केवल "जुमले" देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार और निष्पक्ष परीक्षाओं का भरोसा दिया गया था, लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है।
स्पीकर ओम बिड़ला ने तय किया छह घंटे का समय
दोपहर का सत्र शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन को बताया कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के लिए प्रारंभिक रूप से छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की सहमति होगी तो चर्चा की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है, ताकि सभी दल अपनी बात विस्तार से रख सकें।
युवाओं की नजर संसद की बहस पर
पेपर लीक के लगातार सामने आए मामलों के कारण यह संशोधन विधेयक लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बहस के बाद विधेयक में क्या अंतिम प्रावधान शामिल किए जाते हैं और क्या यह कानून भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में प्रभावी साबित होगा। साथ ही, शिक्षा मंत्री को लेकर जारी राजनीतिक विवाद भी संसद के आगामी सत्रों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।