लॉकडाउन के दौरान झारखंड में वन विभाग के अफसरों की मिलीभगत से कटे पेड़, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
रांची, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में वर्ष 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले की सुनवाई सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि इस मामले में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, रेंजर, वन गार्ड सहित अन्य वनकर्मियों की भूमिका पाई गई है।
झारखंड में दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। इस प्रकरण में पलामू जिले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, जिनकी जांच सीआईडी कर रही है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में एडीजी सीआईडी और मामले के अनुसंधानकर्ता डीएसपी सीआईडी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
अदालत ने जांच की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने के कारण जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और इसमें देरी हुई।
पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि छह वर्षों से जांच लंबित रहना गंभीर मामला है और यह अवमानना की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा था कि केवल दस्तावेजों की मांग का हवाला देना पर्याप्त नहीं है, जबकि सीआईडी को त्वरित और प्रभावी जांच के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए एडीजी सीआईडी और जांच अधिकारी को सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
याचिका में आरोप है कि वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान जामताड़ा, पलामू, चाईबासा और रांची सहित कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की कटाई की गई थी। कटे हुए पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों के जरिए बाहर ले जाया गया था। मामले के उजागर होने के बाद संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच अब भी सीआईडी के जिम्मे है।
--आईएएनएस
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