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लालू यादव की सुरक्षा पर संजय सरावगी बोले- 'सुरक्षा समितियां करती हैं खतरे का आकलन, सरकार की सीधी भूमिका नहीं'

 

पटना, 5 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने रविवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं होती। सुरक्षा इंतजाम सुरक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाते हैं।

लालू प्रसाद यादव ने 'जेड' श्रेणी की सुरक्षा बहाली के बाद अपने बयान में कहा कि सरकार बैकफुट पर आ गई है।

लालू यादव के बयान पर संजय सरावगी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "राज्य और जिला दोनों स्तरों पर सुरक्षा समितियां होती हैं। ये समितियां खतरे का आकलन करती हैं और तय करती हैं कि किसी व्यक्ति को कितनी सुरक्षा की जरूरत है। इससे पहले भी लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा के लिए 150 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए थे। इसमें सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं होती। सुरक्षा इंतजाम सुरक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाते हैं।"

इस दौरान, संजय सरावगी ने राम मंदिर और इस विषय पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर जवाब दिया।

राम मंदिर चंदे को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने कहा, "भारत में करोड़ों लोगों और दुनिया भर में सनातन धर्म को मानने वालों के लिए राम मंदिर आस्था का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई है। कई गिरफ्तारियां हुई हैं और रिकवरी हुई है। एसआईटी को और लोगों से पूछताछ करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।"

उन्होंने कहा कि कोई भी दोषी इस मामले में नहीं बचेगा। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस के लोग आज बोलते हैं, लेकिन इसी कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे। आज तक राहुल गांधी अयोध्या राम मंदिर में दर्शन के लिए नहीं गए। क्या ऐसे लोगों को बोलने का अधिकार है, जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाया।"

सपा प्रमुख पर उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसमें कई लोग मारे गए थे। अब उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आने पर उन्हें अचानक भगवान राम की याद आने लगी है।"

20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र पर संजय सरावगी ने कहा, "संसद और राज्य विधानसभाओं के कामकाज में शीतकालीन सत्र, मॉनसून सत्र और बजट सत्र नियमित रूप से होते हैं। हालांकि, इस बार जस्टिस यशवंत वर्मा के आउटहाउस में आग लगने की घटना भी एक अहम मुद्दा है।"

उन्होंने कहा, "इस घटना में काफी नगदी नोट जले थे। जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा भी हुआ। जांच कमेटी ने रिपोर्ट भी पेश की है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के मामले में 'जीरो टॉलरेंस नीति' पर चलती है। भ्रष्टाचार का बिल पिछले सत्र में आया, लेकिन विपक्ष के रवैये के कारण वह संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था। यह ऐसा विधेयक है, जिसमें मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के लिए प्रावधान हैं। स्वाभाविक है कि कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री जेल में रहते हुए कैसे सरकार चला सकते हैं। पता चला है कि इस बार संसद में विधेयक आ सकता है।"

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प आतंकवाद और नक्सलवाद को जड़ से खत्म करना है। नक्सल से जुड़ी घटनाओं में काफी कमी आई है। एक समय था जब शहरों में, यहां तक ​​कि संसद में भी बम धमाके और जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकवादी हमले आम बात थी। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का संकल्प है कि आतंकवाद को जड़मूल से खत्म करना है। देश में नक्सल से जुड़ी घटनाएं अब लगभग शून्य हो गई हैं।

--आईएएनएस

डीसीएच/