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लखीसराय भगदड़: प्रशांत किशोर ने प्रशासन पर उठाए सवाल, कहा- अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई

 

लखीसराय, 18 अगस्त (आईएएनएस)। जन सुराज के सूत्रधार और विधायक प्रशांत किशोर ने सोमवार को लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से प्रभावित परिवारों और घायलों से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने हादसे के लिए प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि घटना के बाद भी किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी पर जवाबदेही तय नहीं की गई है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि लोगों से बातचीत के बाद प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए जिस गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ व्यवस्था करनी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में यहां भारी भीड़ होती है और हर सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसके बावजूद पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और भीड़ प्रबंधन की समुचित योजना नहीं बनाई गई।

उन्होंने कहा, "सात लोगों की जान गई है। अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। डीएम, एसपी, एसडीएम, डीएसपी या थानेदार किसी पर जवाबदेही तय नहीं हुई। एक हवलदार या कॉन्स्टेबल तक निलंबित नहीं हुआ है।"

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार में दुर्घटना के बाद कुछ मुआवजा देकर मामले को समाप्त मान लेने की प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना उनका अधिकार है, लेकिन सिर्फ आर्थिक सहायता देने से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने हादसे के बाद जांच के आदेश पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि केवल जांच का आदेश देकर खानापूर्ति की जा रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कौन कर रहा है, किन अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है और किसकी जवाबदेही तय की जाएगी। जन सुराज नेता ने घायलों के इलाज की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कई घायल सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं होने के कारण अपने घरों या निजी अस्पतालों में चले गए। उन्होंने कहा कि एक गांव में सहनी परिवार के चार घायलों से मुलाकात हुई, जिन्होंने अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात कही।

प्रशांत किशोर ने कहा कि एक निजी अस्पताल में भर्ती घायलों से भी उन्होंने मुलाकात की और पूछा कि प्रशासन की ओर से उन्हें क्या मदद मिली है। उनके मुताबिक, घायलों को अभी तक कोई ठोस सरकारी सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यह केवल पुलिस या अस्पताल की व्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनशीलता का विषय है।

उन्होंने कहा, "सरकार गलती करे, जनता कष्ट उठाए और फिर जनता के पैसे से मुआवजा बांटकर अपनी जवाबदेही पूरी मान ली जाए, यह उचित नहीं है।"

उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले से पता था कि सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। इसके बावजूद पर्याप्त पुलिस तैनाती और भीड़ नियंत्रण की योजना नहीं बनाई गई। उन्होंने मांग की कि मुआवजे के साथ-साथ दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो तथा घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रशांत किशोर ने कहा कि वह हलसी भी जाएंगे, जहां एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की जानकारी मिली है। वहां प्रभावित परिवार से मुलाकात के बाद सामने आने वाली अन्य जानकारी साझा करेंगे।

--आईएएनएस

एमएनपी/एएस