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‘लड़ाई अभी शुरू हुई, खत्म नहीं’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले पवन खेड़ा

 

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लड़ाई तो अभी शुरू हुई है, खत्म नहीं।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि देश ने शिक्षा मंत्री को नौकरी से हटाया है न कि प्रधानमंत्री ने, लेकिन लड़ाई अभी शुरू हुई है। जब तक प्रधानमंत्री देश के युवाओं से माफी नहीं मांग लेते और 20 जुलाई को जो हिंसा हुई, पैलेट गन चलाई गईं, उसकी जवाबदेही तय नहीं होती, संघर्ष खत्म नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि देश के छात्रों और हमारी जो मांग थी, उनमें से अभी केवल एक मांग ही पूरी हुई है, लेकिन 20 जुलाई को छात्रों के साथ जो हिंसा हुई, उसकी जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए, सिर्फ उस हिंसा के लिए नहीं, बल्कि उन छात्रों के लिए भी जिन्होंने इस संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई। कोई भी इस गलतफहमी में न रहे कि यह संघर्ष का अंत है। यह संघर्ष की शुरुआत है। जवाबदेही तय करनी होगी, माफी मांगनी होगी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने होंगे।

पवन खेड़ा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी युवाओं को अपना 'फ्रेंड' कहते हैं, लेकिन युवा उन्हें अपना दोस्त नहीं मानते। अगर प्रधानमंत्री सच में फ्रेंड होते तो छात्रों पर लाठीचार्ज न करते, आंसू गैस के गोले न दागते, उनपर पैलेट गन न चलाते, युवाओं के साथ खड़े होते, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बाहर का रास्ता दिखाते।

कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि जिद्दी सरकार को आखिरकार युवाओं के सामने झुकना ही पड़ा। उन्होंने कहा कि भारत के ‘छात्रों की गूंज’ आखिरकार सफल हुई। यह भारत के करोड़ों युवाओं की जीत है, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को देशव्यापी जनआंदोलन बना दिया। यह उन सभी छात्रों, अभिभावकों और परिवारों की जीत है, जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई। नीट पेपर लीक के पहले दिन से ही राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करती रही। संसद से लेकर सड़क तक पूरे विपक्ष ने छात्रों के साथ मिलकर यह लड़ाई लड़ी। यह सत्य की जीत है और सरकार के अहंकार की हार, लेकिन हमारी लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होती। अब प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, छात्रों पर लाठीचार्ज करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, तथा शिक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार सुनिश्चित करने चाहिए, जिससे किसी भी छात्र का भविष्य फिर कभी भ्रष्टाचार और पेपर लीक की भेंट न चढ़े।

--आईएएनएस

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