☰
×

एल. मुरुगन ने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की, तमिलनाडु में BJP मजबूत करने के लिए मांगी जिम्मेदारियों से मुक्ति

 

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पांच पेज की चिट्ठी लिखकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है। मुरुगन ने पत्र में कहा कि वह तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देना चाहते हैं। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा भी जताई है।

मुरुगन ने पत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उनके इस कदम को तमिलनाडु में भाजपा के संगठनात्मक काम पर अधिक ध्यान देने की इच्छा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा से स्पष्ट होगी।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं मुरुगन

एल. मुरुगन तमिलनाडु के रहने वाले हैं, लेकिन राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। केंद्रीय मंत्रिमंडल में वह सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे।प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने की इच्छा जताई। उनका कहना है कि वह तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अधिक समय देना चाहते हैं। पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और राज्य में उसकी राजनीतिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

साधारण परिवार से केंद्रीय मंत्री तक का सफर

एल. मुरुगन का पारिवारिक जीवन साधारण रहा है। वह तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कुनूर गांव से जुड़े हैं। उनके माता-पिता लोगनाथन और वरुदम्मल दिहाड़ी मजदूरी करते रहे हैं। गांव में उनका छोटा-सा घर है।मुरुगन जब पहली बार केंद्रीय मंत्री बने थे, तब उनके माता-पिता की सादगी की काफी चर्चा हुई थी। बेटे के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी उनके माता-पिता की दिनचर्या में खास बदलाव नहीं आया। वे गांव में सामान्य जीवन बिताते रहे।गांव के लोगों के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान जब टीकाकरण अभियान चल रहा था, तब लोगनाथन भी आम लोगों की तरह टीका लगवाने के लिए कतार में खड़े हुए थे। यह प्रसंग मुरुगन के परिवार की सादगी को दर्शाने के लिए अक्सर बताया जाता है।

अरुंथथियार समुदाय से आते हैं मुरुगन

एल. मुरुगन अनुसूचित जाति के अरुंथथियार समुदाय से आते हैं। मजदूर परिवार से निकलकर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंचने का उनका सफर राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं और तमिलनाडु में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।उनके इस्तीफे की पेशकश ऐसे समय में सामने आई है, जब तमिलनाडु में भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। मुरुगन की ओर से राज्य में अधिक समय देने की इच्छा जताना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

अब आधिकारिक फैसले पर नजर

मुरुगन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। अब इस संबंध में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होने वाले आधिकारिक फैसले पर नजर रहेगी। उनके अगले राजनीतिक कदम और तमिलनाडु में संभावित भूमिका को लेकर भी आगे स्थिति स्पष्ट हो सकती है।