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कूनो नेशनल पार्क में नया मील का पत्थर: बोत्सवाना से आई मादा चीता को खुले जंगल में छोड़ा, विचरण कर रहे चीतों की संख्या हुई 14

 

श्योपुर, 13 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना को नई गति मिली है। बोत्सवाना से लाई गई एक मादा चीता को बुधवार को खुले जंगल में रिलीज कर दिया गया। चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने प्रेस नोट जारी कर इसकी पुष्टि की। अब खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले चीतों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।

वन विभाग के अनुसार, सभी चीतों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। रेडियो कॉलर, विशेष निगरानी टीमों और तकनीकी उपकरणों के माध्यम से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हाल ही में मादा चीता गामिनी के चार शावकों की मौत से चीता प्रोजेक्ट को झटका लगा था। 11 मई को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कूनो पहुंचकर बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को खुले जंगल में रिलीज किया था। उस समय खुले जंगल में चीतों की संख्या बढ़कर 17 हो गई थी, लेकिन 12 मई को चार शावकों की मौत के बाद यह संख्या घटकर 13 रह गई। बुधवार को एक और मादा चीता को रिलीज किए जाने के बाद संख्या फिर से 14 पहुंच गई है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कूनो नेशनल पार्क में कुल चीतों की संख्या अब 50 हो गई है, जबकि तीन चीते गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में शिफ्ट किए जा चुके हैं। इस प्रकार भारत में कुल चीतों की संख्या 53 रह गई है।

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने बताया कि सभी चीतों की लगातार ट्रैकिंग की जा रही है। उन्होंने कहा, "हमारी टीमें रेडियो कॉलर और फील्ड ऑब्जर्वेशन के जरिए चीतों की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रख रही हैं। उनका स्वास्थ्य, भोजन और प्रजनन व्यवहार सभी का रिकॉर्ड रखा जा रहा है।"

चीता प्रोजेक्ट के तहत बोत्सवाना से लाए गए चीतों को पहले क्वारंटाइन बाड़ों में रखा जाता है, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण और पर्यावरण के अनुकूलन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। सफल अनुकूलन के बाद ही उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाता है।

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना के तहत नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते लाए जा रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क को इस परियोजना का मुख्य केंद्र बनाया गया है। यहां कई मादा चीताओं ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म दिया है, जो परियोजना की सफलता का प्रमाण है। हालांकि कुछ शावकों की मौत जैसी घटनाएं भी हुई हैं, लेकिन वन विभाग लगातार सीखते हुए प्रक्रिया को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है।

--आईएएनएस

एससीएच