कृषि राज्य मंत्री ने रांची में किसानों से किया संवाद, आईसीएआर के ‘खेत बचाओ अभियान’ से जोड़े जाएंगे झारखंड के पांच हजार किसान
रांची, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईसीएआर-आईआईएबी), रांची ने झारखंड के पांच जिलों में पांच हजार से अधिक किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती से जोड़ने के लक्ष्य के साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया है। अभियान के तहत किसानों को उन्नत बीज, कृषि उपकरण और जैविक खेती से जुड़े संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
शुक्रवार को इस अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया।
अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) और जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों से रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के कारण कृषि भूमि की सेहत प्रभावित हुई है। मिट्टी की उर्वरता बहाल करने के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक खाद और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जागरूकता और पहुंच की कमी के कारण बड़ी संख्या में किसान इनका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकार की एजेंसियों से गांवों तक पहुंच बढ़ाने तथा किसानों को सरकारी योजनाओं और नई कृषि तकनीकों की जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए नियमित मिट्टी जांच को भी जरूरी बताया।
आईसीएआर-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने बताया कि संस्थान ने वर्ष 2026 के खरीफ और रबी सीजन में अभियान के तहत कई गतिविधियां संचालित की हैं। किसानों को बैटरी से चलने वाले स्प्रेयर, सब्जियों के बीज किट, सरसों की उन्नत किस्मों के बीज, मटर और गेहूं के बीज के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी वितरित किए गए हैं।
इन पहलों का उद्देश्य फसल उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना है। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल. खोबुंग ने किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के व्यापक प्रचार और मिट्टी की नियमित जांच की आवश्यकता बताई।
उन्होंने झारखंड में जैविक एवं प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता की जानकारी भी दी। कार्यक्रम के दौरान किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। इसमें रासायनिक उर्वरकों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने, जैविक खाद और गोबर की खाद को बढ़ावा देने तथा पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में साइलेज के उपयोग पर चर्चा हुई। किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में 450 से अधिक किसान और महिला किसान शामिल हुए।
--आईएएनएस
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