कोलकाता एयरपोर्ट स्थित मस्जिद में प्रवेश बहाल करने की मांग, हाईकोर्ट में 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
कोलकाता, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट में कोलकाता एयरपोर्ट क्षेत्र में स्थित एक मस्जिद में नमाज के लिए प्रवेश दोबारा शुरू करने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने शुक्रवार की नमाज के लिए तत्काल प्रवेश की अनुमति देने संबंधी अंतरिम प्रार्थना पर फिलहाल कोई राहत नहीं दी। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सव्यसाची चटर्जी ने किशोर दत्ता के नेतृत्व में पक्ष रखा। दलील दी गई कि संबंधित मस्जिद करीब 136 साल पुरानी है और पहले बांकड़ा गांव का हिस्सा थी। एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहीत किए जाने के दौरान मस्जिद को बरकरार रखा गया था, जबकि गांव के लोगों को मध्यमग्राम में बसाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मस्जिद में हर समय प्रवेश की मांग नहीं की जा रही है, बल्कि केवल नमाज के समय लोगों को वहां जाने की अनुमति देने की मांग है। मस्जिद के लिए एक प्रवेश द्वार है, जिसे 'बांकड़ा गेट' कहा जाता है। दलील के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले नमाजियों को एकत्र कर बस के जरिए मस्जिद तक ले जाया जाता था।
इस पर अदालत ने पूछा कि बस की व्यवस्था कौन करता था। जवाब में कहा गया कि संभवतः एयरपोर्ट अथॉरिटी या सीआईएसएफ की ओर से इसकी व्यवस्था की जाती थी।
अदालत ने यह भी सवाल किया कि याचिकाकर्ता संपत्ति पर अपना अधिकार घोषित कराने के लिए सिविल सूट क्यों नहीं दाखिल कर रहा है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वे टाइटल की घोषणा नहीं चाहते, क्योंकि कब्जे से संबंधित दस्तावेज उनके पास हैं। यह भी दावा किया गया कि जमीन अधिग्रहण के दौरान संबंधित हिस्से को छोड़ दिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से धार्मिक उपासना के अधिकार का भी हवाला दिया गया। दलील दी गई कि व्यक्ति चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, उसे उपासना का अधिकार है और मंदिर या मस्जिद में पूजा अथवा इबादत के लिए प्रवेश करना उसका कानूनी अधिकार है। इस संबंध में 1952 के तीन न्यायाधीशों की पीठ के आदेश का उल्लेख भी किया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 11 जुलाई से मस्जिद में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि यह व्यवस्था करीब 50 वर्षों से चली आ रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार प्रवेश रोकने से संबंधित कोई अधिसूचना उन्हें नहीं दी गई।
अदालत से अनुरोध किया गया कि मामले की सुनवाई होने तक मस्जिद में नियंत्रित प्रवेश की पुरानी व्यवस्था जारी रखने की अनुमति दी जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानना चाहा कि इबादत के लिए मस्जिद में कितने लोग जाते हैं।
--आईएएनएस
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