कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली की अनोखी परंपरा, शिखर पर जलाई जाती है अखंड मशाल
कोल्हापुर, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत की पावन भूमि अनादि काल से शक्ति-उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थित शक्तिपीठ सिर्फ आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि हमारी कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर भी हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में विराजमान श्री अंबाबाई मंदिर (महालक्ष्मी मंदिर) ऐसा ही एक पावन और जागृत धाम है।
मां महालक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि इतिहास, आस्था और वास्तुकला का अद्भुत संगम भी है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।
यह मंदिर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, तिरुपति बालाजी की यात्रा के बाद कोल्हापुर अंबाबाई के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण किरणोत्सव है, जो साल में दो बार होता है। इस दौरान डूबते हुए सूर्य की किरणें सीधे मंदिर के अंदर आकर देवी अंबाबाई के चरणों को स्पर्श करती हैं।
दीपावली के अवसर पर श्री अंबाबाई मंदिर के शिखर पर विशेष रूप से दीया और मशाल जलाने की परंपरा है। वहीं नरक चतुर्दशी से लेकर कार्तिक मास (त्रिपुरारी पूर्णिमा तक) के दौरान मंदिर के शिखर पर विशेष दीपदान और मशाल जलाई जाती है। यह परंपरा कार्तिक स्नान और अनुष्ठानों का अहम हिस्सा है।
इस दौरान श्रद्धालु भोर (सुबह जल्दी) में पंचगंगा नदी में स्नान करते हैं, दीपदान करते हैं और फिर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दीपावली की रात मंदिर के शिखर पर जो दीया या मशाल जलाई जाती है, वह अगली अमावस्या तक या तय तिथियों तक निरंतर जलती रहती है। शिखर पर जलती हुई मशाल इस बात का प्रतीक है कि माता महालक्ष्मी की कृपा से भक्तों के जीवन से अज्ञान, कठिनाइयां और आर्थिक तंगी का अंधकार दूर हो। पद्मपुराण आदि के अनुसार कार्तिक मास में विष्णु या शक्ति तीर्थस्थलों पर दीप जलाने से महान यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।
दीपावली के पावन दिनों में मां अंबाबाई को विशेष रूप से सुंदर और बहुमूल्य सोने के गहनों से सजाया जाता है। मंदिर की सजावट और रौनक देखते ही बनती है। भक्तों का यह अटूट विश्वास है कि दिवाली की रात या इस पावन समय पर मां अंबाबाई के दर्शन मात्र से कर्ज, आर्थिक तंगी और पैसों की समस्या दूर होती है तथा घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
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