कोच्चि में 20 से 23 तक होगा 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2', बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण की मेजबानी करेगा नौसेना
नई दिल्ली/कोच्चि, 16 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना 20 से 23 जुलाई 2026 तक कोच्चि स्थित सदर्न नेवल कमांड में 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' का आयोजन करेगी। चार दिनों तक चलने वाला यह बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण कार्यक्रम कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (सीएमएफ) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले कंबाइंड टास्क फोर्स-154 (सीटीएफ-154) के तहत होगा, जो सीएमएफ का विशेष प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।
इस कार्यक्रम में सीएमएफ के साझेदार देशों के सैन्य कर्मी हिस्सा लेंगे। उन्हें समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर पेशेवर प्रशिक्षण, व्यावहारिक अनुभव और एक-दूसरे के सर्वोत्तम कार्य तरीकों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) को साझा करने का अवसर मिलेगा। 40 से अधिक देशों वाले बहुराष्ट्रीय समुद्री संगठन सीएमएफ के साथ भारतीय नौसेना की साझेदारी क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और सामूहिक समुद्री सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षा आधारित अध्ययन, आधुनिक सिम्युलेटर के माध्यम से प्रशिक्षण और व्यावहारिक अभ्यास शामिल होंगे। प्रतिभागियों को समुद्री कानून, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, सूचना साझा करने की प्रणाली, मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के उपाय, बल सुरक्षा, असममित खतरों और मानव रहित समुद्री प्रणालियों जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा प्रतिभागियों को डैमेज कंट्रोल और फायर फाइटिंग, समुद्री संचार, समुद्र में जीवित रहने के तरीके, बोर्डिंग प्रक्रिया तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
भारतीय नौसेना के अनुसार, ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 के जरिए उसकी आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं, अत्याधुनिक सिम्युलेटर, उन्नत प्रशिक्षण पद्धतियों और पेशेवर विशेषज्ञता का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ जोड़कर भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी तालमेल, पेशेवर समझ और सहयोग को और मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा।
कोच्चि के सदर्न नेवल कमांड में इस बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय नौसेना की वैश्विक समुद्री प्रशिक्षण में बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। साथ ही यह सदर्न नेवल कमांड को एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित करता है और भारतीय नौसेना को पेशेवर समुद्री प्रशिक्षण के लिए दुनिया के पसंदीदा केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
--आईएएनएस
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