किसान नेताओं की कथित पिटाई का मामला, विपक्ष ने उठाए सवाल, पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
मेरठ, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव की पुलिस हिरासत में कथित पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस और नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी घटना पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, मेरठ पुलिस ने मारपीट के आरोपों को तथ्यहीन, असत्य और निराधार बताया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिग्विजय भाटी का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "किसान का अपमान, देश का अपमान है।" साथ ही अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है, वह अक्षम्य है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में कथित तौर पर थर्ड डिग्री की मार-पीट कर प्रताड़ित किया जाना दर्शाता है कि हार के डर से सरकार बौखलाई हुई है। सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार की किसान नीति पर भी सवाल उठाए और एमएसपी, खाद की उपलब्धता, कृषि उपज की खरीद, भूमि अधिग्रहण और किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं। अखिलेश ने मामले की गहरी जांच, हर दोषी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और बर्खास्तगी की मांग की।
कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश सरकार को घेरा। पार्टी ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार में लोकतंत्र और मानवाधिकार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। मेरठ में भारतीय किसान यूनियन के नेता दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस की कथित बर्बरता 'जंगलराज' का भयानक चेहरा है। पार्टी के मुताबिक, पीड़ित किसान नेता ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंद कमरे में घंटों बेरहमी से पीटा गया, थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया और गानों पर जबरन नचाकर अपमानित किया गया। कांग्रेस ने भाटी के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सूजी हुई आंख और गंभीर चोटें पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पार्टी ने कहा कि भाजपा सरकार का यह तानाशाही रवैया स्वीकार्य नहीं है।
चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मेरठ में मोहित जाटव और दिग्विजय भाटी के साथ पुलिस हिरासत में हुई कथित बर्बरता कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए कहा कि यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग और हिरासत में यातना है। किसी भी अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराने और आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और आम नागरिकों की आवाज को पुलिसिया ताकत के बल पर दबाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की।
दिग्विजय भाटी ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में तत्कालीन मेरठ एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाने के प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत पुलिसकर्मियों पर पिटाई करने का आरोप लगाया है। भाटी के मुताबिक, वह मोहित जाटव के साथ 19 अगस्त को एसएसपी कार्यालय में गैंगस्टर के एक मुकदमे में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर गए थे। उनका दावा है कि एसएसपी उस समय कार्यालय में मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद एसएसपी कार्यालय पहुंचे और सिपाही के माध्यम से उन्हें अंदर बुलाया गया।
भाटी का आरोप है कि एसएसपी के कार्यालय में उनकी पिटाई की गई। इसके बाद सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ उन्हें और मोहित जाटव को पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय ले गए, जहां दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि बाद में उन्हें सिविल लाइंस थाने ले जाया गया। भाटी के अनुसार, आंखों से खून आने के बाद पुलिस ने आंख और दिमाग के चिकित्सकों को भी थाने बुलाया।
वहीं, मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी कर दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, दोनों अपने-अपने थानों के हिस्ट्रीशीटर हैं। पुलिस के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को दोनों थाना सिविल लाइंस में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमा संख्या 173/2026 के संबंध में पुलिस कार्यालय में वार्ता करने आए थे।
पुलिस का दावा है कि वापस जाते समय स्कूटी फिसलने से दोनों गिरकर घायल हो गए। पुलिस ने कहा कि इस संबंध में दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव ने स्वयं थाना सिविल लाइंस में लिखित प्रार्थना-पत्र दिया था, जिसे सामान्य डायरी में दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, जीडी संख्या 53 में शाम 5:31 बजे इसका उल्लेख किया गया।
मेरठ पुलिस ने कहा कि दिग्विजय सिंह भाटी द्वारा वीडियो के माध्यम से लगाए जा रहे आरोप "तथ्यहीन, असत्य एवं निराधार" हैं। पुलिस ने अपने बयान में दिग्विजय भाटी के खिलाफ वर्ष 2008 से 2026 तक मेरठ, अमरोहा और अन्य थानों में दर्ज कई मुकदमों का उल्लेख किया है। वहीं, मोहित जाटव के खिलाफ भी वर्ष 2015 से 2026 तक कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
-- आईएएनएस
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