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किराना हिल्स पर बेइरादा हमले से घबरा गया था पाकिस्तान, अमेरिका की सक्रियता बढ़ी : रक्षा विशेषज्ञ

 

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके में हुए प्रहार को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान की टिप्पणी कि "भारत का वहां हमले का कोई पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था" चर्चा में है। रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने आईएएनएस से बातचीत में स्पष्ट किया कि भले ही बेइरादा हमला किया गया, लेकिन असर इसका दूर तक पड़ा।

पूर्व मेजर जनरल ने कहा, "भारत का वहां हमला करने का कोई पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था, लेकिन जिस सटीकता से वहां हमला हुआ और उसके बाद अमेरिका तथा पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सामने आई, उसने इस घटना को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया।"

उन्होंने आगे कहा, "पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि किराना हिल्स भारत का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था। इससे पहले एयर मार्शल भारती ने भी ऑपरेशन के बाद कहा था कि किराना हिल्स पर हमला भारतीय अभियान की मंशा नहीं थी।"

कटोच के मुताबिक, "किराना हिल्स में भेजी गई लोइटरिंग म्यूनिशन कथित तौर पर एक रडार या एयर डिफेंस से जुड़े लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए थी। ईंधन समाप्त होने के बाद यह हथियार किराना हिल्स इलाके में गिरा और हो सकता है कि एक एयर वेंट के रास्ते अंदर तक पहुंच गया, जिससे वहां काफी नुकसान हुआ।"

उन्होंने कहा, "इरादा चाहे जो रहा हो, लेकिन किराना हिल्स पर प्रहार हुआ और वह काफी सटीक था। इसके बाद अमेरिका की सक्रियता अचानक बढ़ गई।"

उनके अनुसार, "10 मई के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अमेरिका पहले की तुलना में कहीं अधिक चिंतित नजर आया। यकीनन इसके पीछे किराना हिल्स में हुआ नुकसान एक महत्वपूर्ण कारण था। पाकिस्तान की ओर से उस समय उसकी परमाणु कमांड संरचना को सक्रिय किए जाने की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में पाकिस्तान ने इससे इनकार किया।

किराना हिल्स में कथित परमाणु केंद्रों को लेकर उन्होंने कहा, "इस संबंध में कई तरह की अटकलें हैं, लेकिन ऐसी संवेदनशील जानकारी की सार्वजनिक रूप से पुष्टि करना मुश्किल है। वहां मौजूद कुछ फैसिलिटी के अमेरिकी संबंध हो सकते हैं, लेकिन इसे प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।"

कटोच के अनुसार, "पर्यवेक्षकों और हम विश्लेषकों को पूरा यकीन था कि पाकिस्तान को नुकसान पहुंचा था। पहले अमेरिका जो रुचि नहीं ले रहा था, उसने बीच बचाव किया और लड़ाई रोकने की कोशिश की। मेरा आकलन है कि कारगर तरीके से पाकिस्तान ने घुटने टेके और अमेरिका भी एक्शन में आ गया था।"

चीन की भूमिका पर उन्होंने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी भविष्य के संघर्ष में चीन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को लगातार खुफिया और सैटेलाइट सहयोग दिया। उनका डिफेंस सहयोग 40-50 साल से चल रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, और चीन ने पाकिस्तान को सैन्य और परमाणु क्षेत्र में भी सहयोग दिया है।"

कटोच ने दावा किया कि चीनी खुफिया सहयोग की मदद से पाकिस्तान ने भारत के गहरे इलाकों में कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया।

पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा, "भविष्य में यदि भारत और पाकिस्तान के बीच फिर कोई सैन्य टकराव होता है तो भारत को इस संभावना के लिए तैयार रहना होगा कि पाकिस्तान को चीनी सैटेलाइट और खुफिया तंत्र से सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही उसके साथ तुर्की भी हो सकता है।"

अमेरिका द्वारा बड़ी संख्या में बी-1/बी-2 बिजनेस और टूरिस्ट वीजा रद्द किए जाने की खबरों पर उन्होंने कहा कि इसका असर भारतीयों के एक वर्ग पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने भारतीय युवाओं से देश लौटकर भारत की अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप क्षेत्र में योगदान देने की अपील की। उनके अनुसार, "भारत तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में देश में युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।"

उन्होंने कहा, "मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय युवाओं को देश में रहकर अवसर तलाशने पर विचार करना चाहिए।"

हालांकि, अमेरिका और यूरोप में भारतीय समुदायों के खिलाफ संभावित कट्टरपंथी हमलों की आशंका संबंधी उनकी टिप्पणी को उन्होंने अपने आकलन के रूप में रखा, जिसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

--आईएएनएस

केआर/