खड़गे बोले- सत्ता नहीं, लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस; वीडियो में जाने महिला आरक्षण अभी लागू करने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को कर्नाटक के कलबुर्गी में महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनाव सुधारों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। खड़गे ने सवाल उठाया कि जब लोकसभा की मौजूदा सीटों के आधार पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष को बदनाम करने और महिला आरक्षण के मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
महिला आरक्षण के लिए परिसीमन का इंतजार क्यों?
खड़गे ने कहा कि सरकार मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर ही महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की व्यवस्था कर सकती है। उन्होंने सवाल किया कि इसके लिए परिसीमन का इंतजार करने की जरूरत क्या है।कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करती, तो पहले इसे पारित कराने की कोशिश क्यों करती? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण का विरोधी बताकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके कार्यान्वयन को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
मोदी सरकार पर विपक्ष को बदनाम करने का आरोप
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए आवाज उठा रही है।उन्होंने चुनाव सुधारों को लेकर भी सवाल उठाए। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका, चुनावी प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बदलाव जरूरी हैं।खड़गे ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी एक राजनीतिक दल की जीत सुनिश्चित करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से होने चाहिए। ये आरोप और मांगें कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से रखे गए राजनीतिक विचार हैं।
किरेन रिजिजू के जवाब पर भी उठाए सवाल
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से भेजे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं के पत्रों का खुद जवाब नहीं देते, बल्कि दूसरे नेताओं के माध्यम से जवाब भिजवाते हैं।उन्होंने रिजिजू की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें वास्तविक अधिकार नहीं दिए हैं और उनका इस्तेमाल मध्यस्थ की तरह किया जा रहा है। खड़गे ने इस संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया।दरअसल, रिजिजू ने खड़गे को लिखे पत्र में कहा था कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों से बातचीत करने की कोशिश कर चुकी है। उन्होंने कांग्रेस से विधायी प्रक्रिया में सहयोग करने और रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की थी।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग
महिला आरक्षण के अलावा खड़गे ने परिसीमन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।कांग्रेस का कहना है कि ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलावों पर निर्णय लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने विपक्ष से प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा में सहयोग करने की अपील की है।महिला आरक्षण के कार्यान्वयन, परिसीमन और चुनाव सुधारों को लेकर सरकार तथा विपक्ष के बीच मतभेद के बीच खड़गे के ताजा बयान से राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।