'यह सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, देश का भी अपमान है', खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई अशोभनीय टिप्पणी पर सियासी विवाद गहरा गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्षों समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बयान की निंदा की है। भाजपा सांसदों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सांसद सुनील दत्तात्रेय तटकरे ने भी इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए राजनीतिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की। कई नेताओं ने खड़गे से देश और प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग की है।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने खड़गे की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बयान में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जो काफी आपत्तिजनक है। खड़गे को देश से माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में इस तरह के विवादित बयानों से बचना चाहिए।
प्रेम कुमार ने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान नहीं है, बल्कि देश का अपमान है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खड़गे और राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं तथा अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। इस तरह की बयानबाजी से देशभर में नाराजगी है। उन्होंने खड़गे से समय रहते देशवासियों और प्रधानमंत्री से क्षमा मांगने की अपील की।
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से खड़गे और कांग्रेस की ओर से अनर्गल भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महाना ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश की सत्ता को अपनी बपौती समझा, जनता अब उन्हें समझ चुकी है और नकार चुकी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बयानबाजी से उनकी मानसिक थकान झलकती है। जनता सब देख रही है और इस तरह की भाषा राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद सुनील दत्तात्रेय तटकरे ने भी खड़गे के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
तटकरे ने कहा कि भारत की संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली मजबूत सिद्धांतों पर आधारित है। राजनीतिक दलों और नेताओं को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। व्यक्तिगत टिप्पणी करना उचित नहीं है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेताओं को सार्वजनिक संवाद में संयम और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने खड़गे पर निशाना साधते हुए उन्हें कांग्रेस नेतृत्व में केवल एक माध्यम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के बजाय निर्देशों के अनुसार बयान देते हैं।
जायसवाल ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पार्टी में अध्यक्ष पद पर रहने वाले नेताओं के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया था। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनकी अनुपस्थिति में विवादित बयान देने की जिम्मेदारी खड़गे को सौंपी गई।
भाजपा सांसद संध्या राय ने कहा कि खड़गे वरिष्ठ नेता हैं और उनके प्रति सम्मान का भाव है, लेकिन प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश की 144 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
संध्या राय ने बयान की निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों के कारण प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वरिष्ठ नेता होने के बावजूद खड़गे ने इस तरह का बयान क्यों दिया।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने एक नवंबर को होने वाले एसआईआर विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और मताधिकार के मुद्दे पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी लोक सेवक या संवैधानिक संस्था की ओर से गलत अथवा गैरकानूनी काम किया जाता है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से संरक्षण देना गंभीर सवाल खड़े करता है।
संधवां ने कहा कि लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट के अधिकार के साथ खिलवाड़ करना निंदनीय है और ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों ने भी इसके लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं।
--आईएएनएस
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