केंद्र सरकार ने 12 वर्षों में लोकतंत्र की नींव को खोखला करने का षड्यंत्र किया : मल्लिकार्जुन खड़गे
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में सोनिया गांधी, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत समेत वर्किंग कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।
बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है। हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नींव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को केंद्र सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।"
उन्होंने आगे कहा, "साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस सोच और भावना के विपरीत है, जिसके तहत यह तय किया गया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो और हर वोट की निष्पक्ष गिनती हो। बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था, लोकतंत्र में मताधिकार सबसे बुनियादी चीज़ है। कोई भी व्यक्ति, जिसे हमारे संविधान के हिसाब से मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, उसे किसी स्थानीय प्रशासन के पूर्वाग्रह या किसी अधिकारी की इच्छा पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।"
खड़गे ने आगे कहा, "बाबासाहेब ने कहा था, किसी अफसर की मर्जी से नाम नहीं कटेगा। आज अफसर भाजपा और केंद्र सरकार के इशारे पर मनमर्जी से नाम काट रहे हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबासाहेब जानते थे कि बिना लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के गरीब और वंचित लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसीलिए उन्होंने भारत के हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार देने की जबरदस्त पैरवी की थी। संविधान सभा में हुई बहस में डॉ. अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था। लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है। रक्षक ही भक्षक बन गया है। संविधान ने जिसे पूरी ताकत दी, जनता के वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उसके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?"
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "दिसंबर 1988 में इसी देश के प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दी थी। वहीं, मौजूदा सरकार ने युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना डाली। चुपचाप फॉर्म 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं। चाहे जितने भी षड्यंत्र कर लें, कांग्रेस उन्हें सफल नहीं होने देगी। ये लोकतंत्र, ये वोट का हक, ये हमारी विरासत है, जो खून-पसीने से सींची है, कोई उसे बर्बाद कर दे, ये हम होने नहीं देंगे। हमारी लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्तियों के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के मतदाताओं के अधिकारों, संविधान और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने को लेकर है।"
खड़गे ने कहा, "राहुल गांधी ने सबसे पहले जिन-जिन बातों को उठाया, वे प्रामाणिक रूप से सही साबित हुई हैं। ये बात देश के लोग मान रहे हैं। राहुल गांधी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के मामले में दस्तावेजों के साथ मतदाता आंकड़ों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए था। फर्जी मतदाताओं, फर्जी पता, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और फॉर्म-6 से जुड़ी इंट्री को लेकर उन्होंने जो तथ्य रखे थे, उस दिशा में चुनाव आयोग ने थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज उनकी विश्वसनीयता बची रहती।"
मल्लिकार्जुन ने कहा, "कांग्रेस ने इस देश की संस्थाओं को बनाया, उन्हें स्वतंत्र और अधिकार संपन्न बनाया लेकिन बहुत दुख के साथ कहना पड़ता है कि आज वो सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी है। भाजपा-आरएसएस ये काम पूरी योजना के तहत कर रहे हैं। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है। लेकिन क्या ये पूछना गलत है कि एसआईआर का फैसला किसने लिया? क्या ये पूछना गलत है कि दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया? क्या कुछ गोपनीय चल रहा था?"
खड़गे ने कहा, "कांग्रेस पार्टी की पांच स्पष्ट मांग हैं। मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो। जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले। राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध हो। जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में खुद ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी पक्ष को यह कहने का अवसर न मिले कि जानकारी छिपाई जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "हम इस मुद्दे को किसी चुनाव को केवल जीतने या हारने की लड़ाई के रूप में नहीं देखते। चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है। हमें हर नागरिक से कहना है कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम वोटर है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, या सत्ता में बैठा नेता नहीं।"
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में उपस्थित सदस्यों से कहा, "आज सीडब्ल्यूसी से हमें एक स्पष्ट संकल्प लेना चाहिए। मतदाता सूची पारदर्शी हो, चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष हो, संस्थाएं स्वतंत्र हों और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो। यही संविधान की भावना है। यही लोकतंत्र की आत्मा है और कांग्रेस इस लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटेगी। यह सुनिश्चित करने के लिए हमें जो भी करना होगा, सड़क से संसद तक हमें करना चाहिए।"
खड़गे ने कहा, "इतिहास गवाह है कि इसी सरकार ने 10 साल पहले 'नोटबंदी' का फैसला करके हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को नेस्तनाबूद कर दिया था। 10 साल बाद 'वोटबंदी' की साजिश करके हमारे मजबूत लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। इनकी सभी कु-नीतियों की सबसे अधिक मार गरीबों को पड़ती है। नोटबंदी में गरीब लाइन में खड़ा था। वोटबंदी में गरीब लाइन से ही बाहर कर दिया गया। मैं जानता हूं कि गरीब के पास एक ही ताकत है- उसका वोट, जिसे हम किसी हाल में जाने नहीं देंगे। गरीब, दलित, वंचित और शोषित वर्ग का सबसे बड़ा हथियार वोट होता है, इसलिए सरकार इस अधिकार को छीनना चाहती है, पर हम ऐसा नहीं होने देंगे।"
मल्लिकार्जुन ने कहा, "चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया। अब पूरे देश को मालूम है कि उनकी लगातार कोशिश सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने की रही है। ऐसे में उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। हमारे सामने पांच राज्यों के चुनाव हैं, इसलिए किसी मतदाता का हक न मारा जाए, ये देखना जरूरी है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित हो, चुनाव निष्पक्ष हों, जिससे आम जनता का विश्वास भारत की चुनाव प्रक्रिया में बनी रहे। तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा, लोकतंत्र फलता-फूलता रहेगा।"
--आईएएनएस
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