केंद्र सरकार की योजना ने धुएं से दिलाई मुक्ति, महिलाओं ने पीएम मोदी को कहा धन्यवाद
महोबा, 10 सितंबर (आईएएनएस)। बुंदेलखंड की धरती महोबा उस पहल की गवाह बनी, जहां वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2.0 की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को पारंपरिक चूल्हे के धुएं से राहत दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। पात्र परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने के बाद ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को खाना पकाने के लिए लकड़ी, उपले और अन्य पारंपरिक ईंधन जुटाने की परेशानी से राहत मिली।
उज्ज्वला योजना का असर लाभार्थी महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देता है। जिन परिवारों में पहले खाना पकाने के लिए लकड़ी या उपले जुटाने में काफी समय और मेहनत लगती थी, वहां गैस कनेक्शन मिलने से रसोई का काम अपेक्षाकृत आसान हुआ है। महिलाओं का कहना है कि गैस पर खाना जल्दी बन जाता है और चूल्हे के धुएं से भी राहत मिली है।
महोबा की लाभार्थी मुस्कान ने बताया कि पहले वह पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाती थीं और दूर से लकड़ियां लानी पड़ती थीं, जो काफी मुश्किल काम था। गैस कनेक्शन मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर जल्दी खाना बनाया जा सकता है। पहले चूल्हे के धुएं से आंखों में परेशानी होती थी, लेकिन अब रसोई का काम काफी आसान हो गया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
एक अन्य लाभार्थी ने बताया कि पारंपरिक चूल्हा ठीक से नहीं जलता था और उससे काफी धुआं निकलता था। इसका असर आंखों पर भी पड़ता था। गैस कनेक्शन मिलने के बाद स्थिति बेहतर हुई है। गैस आसानी से जलती है और खाना बनाने में समय की भी बचत होती है।
एक लाभार्थी ने बताया कि पहले उनके पिता जंगल से जलाने के लिए लकड़ी लाते थे। लकड़ी जलाने के दौरान घर में धुआं भर जाता था और परिवार को परेशानी होती थी। गैस स्टोव मिलने के बाद परिवार के लिए खाना बनाना आसान हुआ है और पहले जैसी दिक्कत नहीं रही।
लाभार्थी हेमा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले पारंपरिक चूल्हा जलाने में काफी परेशानी होती थी। कई बार उसे जलाने के लिए फूंक मारनी पड़ती थी। अब गैस कनेक्शन मिलने के बाद खाना पकाने का काम सरल हो गया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया।
एक अन्य महिला लाभार्थी ने बताया कि पहले खाना बनाने के लिए लकड़ी और उपले इकट्ठा करने पड़ते थे। इससे परिवार को काफी परेशानी होती थी। अब घर में गैस कनेक्शन उपलब्ध है और रसोई का काम पहले की तुलना में सुविधाजनक हो गया है।
लाभार्थी सुनीता ने बताया कि वह पहले जंगल से लकड़ी लाकर पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाती थीं। गैस सिलेंडर मिलने के बाद वह गैस पर खाना बना रही हैं और इसे पहले की तुलना में बेहतर अनुभव बता रही हैं।
लाभार्थियों के अनुभवों से यह सामने आता है कि उज्ज्वला योजना का प्रभाव केवल ईंधन के विकल्प तक सीमित नहीं है। महिलाओं के मुताबिक गैस कनेक्शन से खाना बनाने में लगने वाला समय कम हुआ है। साथ ही, लकड़ी और उपले जुटाने में होने वाली मेहनत से भी राहत मिली है। खासकर ग्रामीण परिवारों में यह बदलाव रोजमर्रा के कामकाज में सुविधा के रूप में महसूस किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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