2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधी भारत लाए गए, 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त: केंद्र सरकार
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए 2019 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। खुफिया सूचनाओं, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर आधारित एक मजबूत तंत्र विकसित कर विदेशों में छिपे अपराधियों को भारत लाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई है।
सरकार का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों के कारण अब विदेशों में शरण लेकर कानूनी कार्रवाई से बच पाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है।
केंद्र सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। सरकार की ओर से वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति बनाई गई। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया।
केंद्र सरकार 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा।
वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया, जिनमें भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। पहली बार, बीएनएस की धारा 355 और 356 में 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान रखा गया जिससे भगोड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी।
2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें गृहमंत्री अमित शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन का संदेश दिया। भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच समन्वय, संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए गृहमंत्री की ओर से जनवरी, 2025 में 'भारतपोल' लॉन्च किया गया। 'भारतपोल' ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत कर एक इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया।
इसके तहत, राज्य और केन्द्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके कारण सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच इन्फार्मेशन शेयरिंग के रेस्पॉन्स टाइम में भारी कमी आई है।
केंद्र सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) को सख्ती से लागू किया है। पीएमएलए के सख्ती से लागू होने से सरकार ने वर्ष 2019 से 2026 तक भगोड़ों की कुल 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। 2019 से 2026 तक 18,762 करोड़ रुपए की सफल वापसी की गई। इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है।
सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया। यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनियाभर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य व केंद्रीय जांच एजेंसी में सीबीआई ने इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं।
इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी हुए हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई।
वापस लाए गए भगोड़ों में टेररिस्ट, गैंगस्टर, फाइनेंशियल ऑफेंडर्स, नार्कोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज्म, प्रो-खालिस्ता एक्सट्रीमिज्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है।
तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को-टेरर और क्रॉस-बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था।
देश के अंदर समन्वय में आईबी, सीबीआई, रॉ, एनआईए, ईडी, एमईए, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस की साझा भूमिका है। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है।
--आईएएनएस
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