कटनी के 200 साल पुराने मां जालपा देवी मंदिर में विराजमान हैं 64 योगिनियां, नवरात्र पर उमड़ी भक्तों की भीड़
कटनी, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कटनी शहर के बीचों-बीच विराजमान मां जालपा देवी का मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के पहले दिन रविवार को मंदिर मेंअपार संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे।
मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है। यहां मां जालपा देवी की मूर्ति स्थापित है। उन्होंने कहा, "पहले यहां जंगल हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां लगातार विस्तार होता जा रहा है और मंदिर का निर्माण होता जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि आज नवरात्रि पर्व शुरू हो चुका है। यहां कटनी शहर के अलावा आसपास के क्षेत्रों के लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे निखिल ने आईएएनएस से कहा कि कटनी के इस मंदिर में मां जालपा, मां कालका और मां शारदा समेत कुल 64 योगिनियां स्थापित हैं। यहां आसपास के इलाकों से लोग आते हैं और भक्तिमय वातावरण रहता है। शाम की आरती के समय यहां बहुत अच्छा लगता है।
कशिश वर्मा ने कहा, "यहां कटनी के मंदिर में मेरे माता-पिता लगातार दर्शन के लिए आते रहे हैं। मैं पहली बार यहां आई हूं। यहां बहुत अच्छा लग रहा है।"
मान्यता है कि यहां मां स्वयं शिला के रूप में प्रकट हुई थीं। कभी घने बांस के जंगल से घिरे इस स्थान पर आज भव्य मंदिर स्थापित है, जहां नवरात्र के दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ता है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु परिवार सहित मां के दरबार में माथा टेकने और अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मंदिर में मां जालपा देवी के साथ मां कालका, मां शारदा और 64 योगिनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, करीब 250 वर्ष पहले रीवा जिले के एक छोटे से गांव से बिहारीलाल पंडा अचानक कटनी आ पहुंचे थे। उस समय आज के जालपा वार्ड में दूर-दूर तक बांस का घना जंगल हुआ करता था। मान्यता है कि मां जालपा देवी ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद जब उन्होंने जंगल में वर्तमान मंदिर स्थल की सफाई शुरू की, तो वहां एक शिला के रूप में मां जालपा की प्रतिमा मिली। इसके बाद विधि-विधान से प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई और एक छोटी-सी मढ़िया में मां को विराजमान किया गया।
धीरे-धीरे मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और यह स्थान श्रद्धालुओं की श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन गया। करीब 50 वर्ष पहले मंदिर समिति ने जयपुर से मां जालपा, मां कालका और मां शारदा की प्रतिमाएं लाकर स्थापित कराईं। साथ ही यहां 64 योगिनियों की स्थापना भी की गई। आज नवरात्र ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
यहां मां जालपा के साथ-साथ मां काली, मां शारदा, भगवान हनुमान और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर परिसर में 64 योगिनियों की भी स्थापना की गई है। मंदिर में वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है। यह स्थान विशेष रूप से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करने और विवाह संबंधी मन्नत के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
--आईएएनएस
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